छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में मंगल कार्बन प्लांट में हुए भीषण ब्लास्ट ने एक पूरे परिवार को उजाड़ दिया। 5 फरवरी को खरसिया थाना क्षेत्र के ग्राम बानीपाथर स्थित प्लांट में हुए विस्फोट के बाद इलाज के दौरान मृतकों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। 9 माह की मासूम बच्ची की पहले मौत हुई, जबकि 11 फरवरी को पिता, दादा और एक अन्य युवक ने भी दम तोड़ दिया। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की असमय मौत से गांव में मातम पसरा है।
घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने मुआवजा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर नेशनल हाईवे पर शव रखकर चक्काजाम किया। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचे और समझाइश के बाद स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।
अस्पताल में पसरा सन्नाटा, परिजनों का विलाप
हादसे के बाद अस्पताल के वार्ड में उस मां की चीखें गूंजती रहीं, जिसने अपनी 9 माह की दूधमुंही बच्ची और पति को खो दिया। गंभीर रूप से झुलसे साहेब लाल खड़िया वेंटिलेटर पर थे, लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया। परिवार पर एक साथ टूटे इस दुख ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है।
इलाज के लिए पहले जिला अस्पताल, फिर जिंदल अस्पताल और बाद में रायपुर स्थित कलड़ा बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी सेंटर में घायलों को भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के अनुसार कई घायलों की हालत लंबे समय तक नाजुक बनी रही।
ऐसे हुआ था भीषण ब्लास्ट
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक 5 फरवरी की सुबह करीब 10 बजे प्लांट के फर्नेस में पुराने टायर गलाने का काम चल रहा था। इसी दौरान मशीन का ढक्कन अचानक खुल गया। बताया जा रहा है कि ऑक्सीजन अंदर पहुंचते ही जोरदार धमाका हुआ। विस्फोट के साथ आग की तेज लपटें उठीं और गर्म पदार्थ वहां काम कर रहे श्रमिकों पर जा गिरा।
घटना में एक मासूम सहित सात श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए। सहकर्मियों ने तत्काल प्रबंधन को सूचना दी और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने मौके का मुआयना कर जांच शुरू कर दी है। हादसे के सटीक कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
मृतकों के नाम और पारिवारिक त्रासदी
हादसे में जिन चार लोगों की मौत हुई, उनमें—
भूमि खड़िया (9 माह)
शिव खड़िया (27 वर्ष)
साहेब लाल खड़िया (45 वर्ष)
इंदीवर (19 वर्ष)
भूमि, शिव और साहेब लाल एक ही परिवार के सदस्य थे। एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत ने गांव को शोक में डुबो दिया है। परिवार की महिला सदस्य उदासिनी खड़िया भी झुलसी हैं और उनका उपचार जारी है।
घायलों की स्थिति गंभीर
हादसे में कई अन्य श्रमिक भी झुलसे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुछ घायलों को 70 से 90 प्रतिशत तक जलन की चोटें आईं। डॉक्टरों का कहना है कि गंभीर रूप से झुलसे मरीजों की स्थिति में सुधार धीरे-धीरे होता है और निरंतर निगरानी की जरूरत रहती है।
परिजनों के मुताबिक परिवार के चार सदस्य एक साथ काम के दौरान हादसे की चपेट में आए। इस घटना ने श्रमिक सुरक्षा मानकों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
श्रमिक सुरक्षा पर उठे सवाल
उदासिनी खड़िया के भाई सूरज किसान ने आरोप लगाया कि प्लांट में काम के दौरान सुरक्षा गाइडलाइन का पर्याप्त पालन नहीं किया जाता था। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का सख्ती से अनुपालन होता, तो यह हादसा टल सकता था।
ग्रामीणों ने भी श्रमिकों के लिए सुरक्षा उपकरण, नियमित निरीक्षण और प्रशिक्षण की व्यवस्था की मांग उठाई है। उनका कहना है कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
मुआवजे की मांग और हाईवे जाम
घटना से नाराज ग्रामीणों ने मृतकों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए नेशनल हाईवे पर प्रदर्शन किया। प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर वार्ता की और आश्वासन दिया कि जांच निष्पक्ष होगी तथा दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, घटना की विस्तृत जांच के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं। पोस्टमार्टम और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
FIR वापस लेने के आरोप
हादसे के बाद खरसिया थाने में प्लांट प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। परिजनों का आरोप है कि अब उन्हें बयान बदलने और केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। पुलिस ने इस संबंध में कहा है कि जांच प्रक्रिया कानून के अनुसार आगे बढ़ेगी और किसी भी प्रकार के दबाव की शिकायत मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
आगे क्या?
रायगढ़ का यह औद्योगिक हादसा श्रमिक सुरक्षा और औद्योगिक मानकों पर गंभीर सवाल छोड़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में नियमित ऑडिट, सुरक्षा ड्रिल और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को सुदृढ़ करना आवश्यक है।
एक परिवार की त्रासदी ने पूरे क्षेत्र को शोकाकुल कर दिया है। अब नजर प्रशासनिक कार्रवाई और मुआवजे की प्रक्रिया पर है। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जांच पारदर्शी होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।