जब इस संबंध में खरसिया ब्रांच के ( SWC ) ब्रांच मैनेजर विकाश gedion से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि गोदाम का बीमा कराया गया है और बीमा कंपनी से क्षति की भरपाई की जाएगी। लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर व्यवस्था समय रहते दुरुस्त की गई होती, तो इतना बड़ा नुकसान रोका जा सकता था। बीमा से नुकसान की भरपाई तो हो सकती है, लेकिन इससे गरीबों को समय पर राशन नहीं मिलेगा और सरकार की योजनाओं पर भी असर पड़ेगा ।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने गोदाम प्रबंधन की लापरवाही पर नाराज़गी जताई है और मांग की है कि दोषियों पर कार्रवाई हो तथा गोदामों की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाए। साथ ही यह भी मांग की गई है कि बारिश से पहले सभी गोदामों की स्थिति की जांच की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
यह घटना सिर्फ एक तकनीकी चूक नहीं, बल्कि ज़िम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता का नतीजा है, जिसने ना सिर्फ सरकार के संसाधनों का नुकसान किया बल्कि ज़रूरतमंद जनता के हक पर भी कुठाराघात किया है।