अंबिकापुर. शिवाजी महाराज का नाम इतिहास के पन्नों में अमर है. शिवाजी महाराज ने स्वराज्य और हिंदुत्व को लेकर मुगल शासक औरंजेब को नाकों चने चबाना छत्रपति शिवाजी महाराज के कई किस्से है. इन्ही किस्सों में एक किस्सा है छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर आने की. दरअसल बात उस समय की है जब औरंगजेब ने धोके से शिवाजी को आगरा में कैद कर लिया था. अपनी चतुराई से औरंगजेब के आगरा के कैद से शिवाजी महाराज भाग निकले. इसी दौरान शिवाजी महाराज अंबिकापुर पहुंचे. अंबिकापुर पहुंचने की एक और वजह भी थी. अंबिकापुर से लेकर उत्तर प्रदेश का अधिकतर इलाका घनघोर जंगल हुआ करता था.
मराठा सेना घात लगाकर हमला करती थी. जंगलों में छिपने में माहिर थे. यही वजह है कि औरंगजेब मराठी सेना को पहाड़ी चूहा भी कहते थे. जानकार बताते है कि औरंगजेब के कैद से बड़ी ही चालाकी से फलों की टोकरी में बैठकर भाग निकले.
मराठा सेना घात लगाकर हमला करती थी. जंगलों में छिपने में माहिर थे. यही वजह है कि औरंगजेब मराठी सेना को पहाड़ी चूहा भी कहते थे. जानकार बताते है कि औरंगजेब के कैद से बड़ी ही चालाकी से फलों की टोकरी में बैठकर भाग निकले.