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मिलावटी पानी पर सख्ती, छत्तीसगढ़ के इस जिले में तीन संस्थानों में दबिश

बलौदाबाजार:इन दिनोंबोतलबंद पानी और अन्य पेय पदार्थों की मांग बढ़ी है. इसी के साथ बढ़ा है मिलावटी व घटिया गुणवत्ता के उत्पादों का खतरा. ऐसे में बलौदाबाजार जिले के लोगों को शुद्ध पानी और खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने कलेक्टर दीपक सोनी के निर्देश पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग पूरी मुस्तैदी से मैदान में उतर चुका है.

मंगलवार को प्रशासनिक टीम ने जिले के तीन प्रमुख पानी पैकेजिंग संस्थानों में एक साथ दबिश दी और पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों के नमूने जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजे. इस कार्रवाई ने स्थानीय कारोबारियों में हलचल मचा दी है और नागरिकों के बीच राहत की भावना जगी है.

कहां-कहां हुई कार्रवाई?

भाटापारा, सागर इंडस्ट्रीज:यहां पर प्रशासनिक टीम ने पेयजल के पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर पाउच का सैंपल लिया. ये नमूने राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला रायपुर भेजे गए हैं, जहां यह जांचा जाएगा कि ये पैकेजिंग मानव उपयोग के लिए सुरक्षित है या नहीं.

बलौदाबाजार, बी.पी. वाटर प्लांट:

बलौदाबाजार – देवेंद्र एक्वा:इन दोनों संस्थानों से 10 प्रकार के पैकेजिंग मटेरियल, जिनमें PET बॉटल्स, PET कैप, एलडीपीई (LDPE) फिल्म, और वॉटर पाउच शामिल हैं, को राज्य से बाहर की मान्यता प्राप्त परीक्षण प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा गया है.

गर्मी में पेयजल की खपत बढ़ जाती है. ऐसे समय में यदि कोई घटिया या गैर-फूड ग्रेड प्लास्टिक का उपयोग करता है, तो यह जनता की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ है. हम सतर्क हैं और ऐसे सभी संस्थानों पर कड़ी निगरानी जारी रहेगी.- उमेश वर्मा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी

खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक नियमित औचक जांच नहीं थी, बल्कि नागरिक सुरक्षा के लिए प्रशासनिक सख्ती का सीधा उदाहरण है.

क्या है पैकेजिंग की अहमियत?:पेयजल जितना शुद्ध होना चाहिए, उतना ही महत्वपूर्ण उसकी पैकेजिंग मटेरियल की गुणवत्ता भी होती है. यदि पानी को घटिया गुणवत्ता वाली प्लास्टिक बोतलों या पाउच में पैक किया जाता है, तो उसमें रसायन घुल सकते हैं. जिससे पेट संबंधी रोग, हार्मोन असंतुलन और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं.

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