कोरबा: शासन स्तर से युक्तियुक्तकरण के संबंध में आदेश जारी हो चुका है. प्रदेश भर में 10,000 से अधिक स्कूल इससे प्रभावित हैं. कोरबा जिले में भी 464 स्कूल इस प्रक्रिया से प्रभावित हो रहे हैं, जो एक ही परिसर में संचालित हैं. पांच स्कूल ऐसे हैं, जो अपने समीप वाले स्कूल के 1 किलोमीटर के दायरे में आए हैं. यह पूरी तरह से बंद होंगे और इस स्कूल के छात्रों को समीप स्थित स्कूल में मर्ज कर दिया जाएगा ।
अतिशेष शिक्षकों की होगी काउंसलिंग: कोरबा जिले में 307 प्राइमरी स्कूल शिक्षक, 154 माध्यमिक स्कूल के शिक्षक इस प्रक्रिया से प्रभावित होंगे. हायर सेकेंडरी के भी 8 व्याख्याता प्रभावित हो रहे हैं. जिन्हें अब दूसरे स्कूल में भेजा जाएगा. 31 मई और 1 जून को इन सभी प्रभावित अतिशेष शिक्षकों के लिए काउंसलिंग होगी. इसके बाद सभी को शासन के आदेश के तहत एकल शिक्षाकीय और शिक्षक विहीन स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा.
शिक्षकों का विरोध: इस प्रक्रिया का छत्तीसगढ़ के शिक्षक संगठन जमकर विरोध कर रहे हैं. चरणबद्ध आंदोलन की बात भी कह रहे हैं. वहीं शासन और अधिकारी कह रहे हैं कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा. व्यवस्था में कसावट आएगी, लेकिन शिक्षक संगठन लगातार इसका विरोध कर रहे हैं. वह विरोध क्यों कर रहे हैं. यह जानने के लिए ईटीवी भारत ने शिक्षकों से बात की ।
केस 1: प्राथमिक शाला चोरभट्ठी में पुरुषोत्तम साहू शिक्षक के तौर पर पदस्थ हैं. पुरुषोत्तम 2022 में इस स्कूल में आये थे. तब यह एकल शिक्षक स्कूल था. यहां कोई भी शिक्षक मौजूद नहीं था. साहू कहते हैं कि जॉइनिंग के समय से मैं यहां अध्यापन कार्य करा रहा था. कुछ दिन पहले यहां एक नए शिक्षक की पदस्थापना हो गई है, जो फिलहाल परिवीक्षा अवधि में है. उनका नियमितीकरण नहीं हुआ है. लेकिन जूनियर होने के बाद भी उन्हें अतिशेष नहीं किया गया है.
मुझे अतिशेष करार दे दिया गया है. इसके कारण मुझे दूसरे स्कूल में भेजा जा रहा है. शिक्षा विभाग की दोगली नीति का खामियाजा मुझे भुगतना पड़ रहा है-पुरुषोत्तम साहू, शिक्षक
केस 2: माध्यमिक शाला डांगरियाखार में सरस्वती सिंह कंवर 2008 से पदस्थ हैं. सरस्वती कहती है कि जब मेरी यहां पर पोस्टिंग हुई थी, तब यहां कोई भी शिक्षक मौजूद नहीं था. शिक्षकविहिन स्कूल को मैंने पिछले 7 सालों से संभाला है. 7 साल की लंबी सेवा अवधि हो चुकी है. इसके बाद अब मुझे सबसे जूनियर करार देते हुए अतिशेष कर दिया गया है ।
मेरा पूरा परिवार यहां निवासरत है. बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. यह तो मेरे साथ अन्याय करने जैसा है. मैं मानसिक तौर पर पीड़ित हूं - सरस्वती सिंह कंवर, शिक्षक
केस 3 : शिक्षक भानु यादव सूरजपुर से अपना स्थानांतरण करा कर कोरबा जिले में आए हैं. अब उन्हें अतिशेष कर दिया गया है. यादव कहते हैं कि मैं वर्तमान में माध्यमिक शाला दूरपा में पदस्थ हूं. 17 साल मैंने सूरजपुर में सेवा दी. उसके बाद पद रिक्त होने के बाद मुझे शासन स्तर से कोरबा के दूरपा में स्थानांतरित किया गया और अब इसी स्थान से मुझे अतिशेष करार दे दिया गया है. 2 महीने पहले ही यहां पद खाली था और अब मुझे अतिशेष किया जा रहा है ।
यह सब वर्ष 2008 के सेटअप में बदलाव के कारण हुआ है. इस सेटअप में एक शिक्षक की संख्या को घटा दिया गया है. जिसके कारण मुझे बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है - भानु यादव, शिक्षक
केस 4 : सहायक शिक्षक अशोक कुमार कश्यप बताते हैं कि मैं प्राथमिक शाला बलगी में पदस्थ था. मेरा स्थानांतरण इस स्कूल में प्रशासनिक आधार पर शासन स्तर से किया गया था और यह पूरी तरह से शिक्षक विहीन स्कूल था. हाल ही में यहां कुछ और शिक्षकों की नियुक्ति हो गई है और मुझे अतिशेष कर दिया गया है. जबकि मैं इस स्कूल का सबसे पुराना शिक्षक हूं.
सीनियर हूं, मेरे बाल बच्चे यहीं पढ़ रहे हैं. यह तो मानसिक प्रताड़ना की तरह है. हमारे साथ सीधे तौर पर अन्याय किया जा रहा है -अशोक कुमार कश्यप, सहायक शिक्षक
युक्तियुक्तिकरण हो, लेकिन सेटअप में न किया जाए बदलाव: छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष और शिक्षक नित्यानंद यादव कहते हैं कि सरकार युक्तियुक्तकरण करे, हम इसका विरोध नहीं कर रहे हैं. 2008 के सेटअप के अनुसार प्राथमिक शाला में एक प्रधान पाठक और दो शिक्षक जबकि माध्यमिक शाला में एक प्रधान पाठक पर चार शिक्षकों को नियुक्ति दी जाती थी. इस सेटअप में एक एक शिक्षक की संख्या को घटा दिया गया है. जिसके कारण बड़ी तादात में शिक्षक अतिशेष हो गए हैं. 307 प्रायमरी तो 154 माध्यमिक स्कूल के शिक्षक अतिशेष हैं ।
यदि सेटअप को ठीक तरह से लागू किया जाए तो अतिशेष शिक्षकों की संख्या कम हो जाएगी. अधिकारी कह रहे हैं कि शिक्षा में गुणवत्ता आएगी, लेकिन वह किस आधार पर ऐसा कह रहे हैं. यह हमें समझ में नहीं आ रहा है -नित्यानंद यादव, शिक्षक
शिक्षा की गुणवत्ता पर असर: नित्यानंद यावद यह भी कहते हैं कि यदि दो शिक्षकों को पांच कक्षा को पढ़ाने को कह दिया जाएगा, तो निश्चित तौर पर गुणवत्ता प्रभावित होगी. अधिकारी इसे ठीक से समझ नहीं पा रहे हैं. जिसके कारण ऐसा हो रहा है. आने वाले समय में शिक्षा की गुणवत्ता गिरेगी.