दुर्ग | राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र उदयपुर राजस्थान में 6 से 10 अगस्त से आयोजित शिक्षा में पुतली कला की भूमिका विषय पर रिफ्रेश कोर्स का आयोजन हुआ, जिसमें देश के लगभग 12 राज्यों के शिक्षकों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के सात शिक्षक प्रतिभागी बने। इसमें बालोद जिले के शिक्षक युगल देवांगन के नेतृत्व में छग की संस्कृति को प्रदर्शित कर पारंपरिक वेशभूषा में लोक नृत्य व छग की पारम्परिक पकवान ठेठरी, कटवा, खुर्मी के स्वाद से सभी शिक्षकों को अवगत कराया गया। कार्यशाला में राज्य से शिक्षक संतोष कर्श, लुकेश राम साहू, हरि राम साहू, शेखन राम साहू, रूपेश सोनी ने सहभागिता दी।
संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार अधीन सांस्कृतिक स्रोत व प्रशिक्षण केंद्र उदयपुर राजस्थान में रचनात्मक पुतली कला प्रशिक्षण 6 से 10 अगस्त तक हुआ। प्रशिक्षण में 10 राज्यों के प्रतिभागी शामिल हुए। छत्तीसगढ़ से भी प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। धमतरी जिले से पांच शिक्षक का चयन हुआ, जो इस प्रशिक्षण में शामिल हुए।
प्रशिक्षण में प्रतिदिन पुतली कला प्रशिक्षण के साथ-साथ प्रत्येक राज्य को अपनी संस्कृति, परंपरा प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराया गया। धमतरी जिले के सहायक शिक्षक लुकेश राम साहू के नेतृत्व में शेखन राम साहू, सोमन कुमार साहू, हरिराम साहू, रुपेश कुमार सोनी, कोरबा से संतोष कुमार कर्ष, बालोद से युगल किशोर देवांगन ने राजकीय गीत, राऊत नाचा, पंथी नृत्य, देवार गीत के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की शिल्प कला, पकवान, राजकीय प्रतीक आदि से रूबरू कराकर प्रस्तुति दी। लुकेश राम ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य एक-दूसरे की संस्कृति को जानना समझना, सम्मान करना है। स्कूलों में कल्चरल क्लब का गठन कर संस्कृति को प्रोत्साहन देना है
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