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स्वतंत्रता दिवस विशेष : स्वाधीनता के नए मुकाम



आज जब हम अपनी स्वतंत्रता की 78वीं सालगिरह मना रहे हैं, तो गुजरे सात दशकों में हासिल हुई अपनी उपलब्धियों पर गौरवान्वित होना स्वाभाविक ही है। दो सौ साल तक ब्रिटिश उपनिवेशवाद का दंश झेलने के बाद देश आर्थिक रूप से लगभग जर्जर अवस्था में पहुंच गया था। धार्मिक आधार पर हुए देश के बंटवारे और उस क्रम में हुई हिंसा ने देश में अभूतपूर्व सांप्रदायिक संकट खड़ा कर दिया। वैसे गहन चुनौती से भरे माहौल में 15 अगस्त 1947 को भारतवासियों ने सदियों के बाद स्वतंत्र माहौल में सांस लेते हुए सूरज की पहली किरणें देखीं। वहां से 'नियति से मिलन की जो यात्रा शुरू हुई, उसकी कुछ मंजिलें भले अभी भी दूर हों, मगर हमने उसमें कई अहम मुकामों को हासिल किया है।
दशकों पहले मानव इतिहास के सबसे बड़े लोकतांत्रिक आयोजन के तहत देश ने एक नया मार्ग चुना। स्पष्ट जनादेश हासिल कर नरेंद्र मोदी ने 2014 के 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से भारतवासियों को संबोधित किया था। उस रोज उन्होंने देश को नई दिशा में ले जाने का इरादा जताया। नए लक्ष्य सामने रखे। अब जबकि वे अपने मौजूदा कार्यकाल के अंतिम वर्ष में इस स्वाधीनता दिवस पर लाल किले पर तिरंगा फहराने के बाद राष्ट्र को संबोधित करेंगे, तो देशवासियों को जानने का मौका मिलेगा कि नए लक्ष्यों को हासिल करने में मिली सफलता के बारे में प्रधानमंत्री का क्या आकलन है।
लाल किले से प्रधानमंत्री का संबोधन आम भाषण नहीं होता। बल्कि राष्ट्रीय गौरव के अवसर पर यह राष्ट्र के सामने उसके नेता का उद्बोधन होता है। देश इसके जरिए यह जानने की अपेक्षा रखता है कि संवैधानिक उद्देश्यों को पूरा करने को लेकर राजनीतिक नेतृत्व की सोच क्या है? भारतीय संविधान में निहित लक्ष्य हमारे राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान विकसित हुए। सबके लिए न्याय, सभी नागरिकों की बुनियादी स्वतंत्रताओं को सुनिश्चित करना और सबको समान अवसर मुहैया कराना इनमें सर्वप्रमुख हैं। इन्हीं मकसदों ने हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य को विशेष स्वरूप दिया है। लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई हर सरकार इन उद्देश्यों से बंधी होती है। अपने कार्यकाल में इन मकसदों को हासिल करने की दिशा में वह कितनी आगे बढ़ी, यही उसके मूल्यांकन की कसौटी रही है। ऐसा परीक्षण करने में अपने देश के नागरिकों ने अद्भुत बुद्धि-कौशल का परिचय दिया है। हमारी राजनीतिक समझदारी का लोहा सारी दुनिया ने माना है। स्वतंत्रता दिवस वह मौका है, जब हम इसके महत्व पर जोर दें और इस समझ को लगातार गहराई देने का संकल्प लें। सतत जागरूकता ही स्वतंत्रता की गारंटी होती है। हमें इसका स्मरण रखना चाहिए कि 15 अगस्त 1947 को हमने सिर्फ राजनीतिक आजादी हासिल की थी। उसके बाद देश ने विकास का खास रास्ता चुना, ताकि सभी भारतीय आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी खुद को आजाद महसूस कर सकें। इन दिशाओं में अभी लंबा सफर हमें तय करना है। अत: इस यात्रा की राह में आने वाली तमाम बाधाओं को दूर करने का संकल्प लेने का दिन आज है।

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