छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना शहर में सीमांचल बेहरा का मिनी समोसा ठेला आज स्थानीय लोगों के बीच खास पहचान बना चुका है. 25 साल पहले उनके पिता द्वारा शुरू किया गया यह अनोखा मिनी समोसा आज भी ग्राहकों को आकर्षित कर रहा है. रोजाना करीब 1000 मिनी समोसे की बिक्री होती है और कुल कमाई 5000 रुपये तक पहुंच जाती है. तीन तरह की चटनी के साथ परोसे जाने वाले इन समोसों का स्वाद लोगों को दूर-दूर से खींच लाता है. यह कहानी मेहनत, स्वरोजगार और पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाने की प्रेरक मिसाल है.
छत्तीसगढ़ के बसना शहर के बस स्टैंड पर लगने वाला सीमांचल बेहरा का नाश्ता ठेला आज इलाके की पहचान बन चुका है. यहां मिलने वाला मिनी समोसा स्वाद और साइज दोनों में अलग है. सुबह से लेकर शाम तक ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है और सबसे ज्यादा डिमांड इसी खास मिनी समोसे की रहती है.
25 साल पुराना आइडिया, आज भी बरकरार स्वाद
सीमांचल बेहरा बताते हैं कि मिनी समोसा बनाने का आइडिया उनके पिता का था. करीब 25 साल पहले उन्होंने इस अनोखे छोटे आकार के समोसे की शुरुआत की थी. उस समय 10 रुपये में 10 मिनी समोसे मिलते थे. आज महंगाई बढ़ गई है, लेकिन फिर भी 20 रुपये में 14 नग मिनी समोसे दिए जाते हैं, जो ग्राहकों को किफायती भी लगते हैं और स्वादिष्ट भी.
तीन तरह की चटनी से बनता है खास
इन मिनी समोसों को खास बनाने के लिए मिर्ची चटनी, मीठी चटनी और दही चटनी परोसी जाती है. छोटे-छोटे समोसे बनाना मेहनत का काम जरूर है, लेकिन सीमांचल कहते हैं कि जब ग्राहक तारीफ करते हैं तो सारी थकान दूर हो जाती है.