पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम पंचायत तमता में पौष पूर्णिमा के अगले दिन लगने वाले ऐतिहासिक तीन दिवसीय मेले का सोमवार को समापन हुआ। आयोजकों के अनुसार इस वर्ष मेले में लगभग एक लाख श्रद्धालु पहुंचे। आस्था और रोमांच के इस केंद्र पर व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए कलेक्टर और एसएसपी मौके पर पहुंचे।
पत्थलगांव मुख्यालय से 20 किमी दूर स्थित यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्ता के लिए जाना जाता है। श्रद्धालु 400 फीट ऊंचे पहाड़ पर स्थित 365 सीढ़ियां चढ़कर केसला पाठ देवता के दर्शन करते हैं। चोटी पर स्थित विशाल कुंड, जो साल भर पानी से भरा रहता है, श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। मेले में दुकान लगाने वाले सभी मालिकों और उनके कर्मचारियों का आधार कार्ड जमा करना अनिवार्य किया गया था।
तमता-डूमरबहार मुख्य मार्ग पर यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए सड़क किनारे दुकानें लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 50 से अधिक पुलिस बल तैनात किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ पारंपरिक संस्कृति की झलक भी मेले में देखने को मिली। ग्रामीणों और व्यापारियों द्वारा लगाए गए दुकानों में पूजा सामग्री, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और खानपान की चीजें उपलब्ध रहीं। पूरा क्षेत्र भक्ति, उल्लास और लोकसंस्कृति के रंग में रंगा नजर आया।
आस्था और पर्यटन केंद्र के रूप में करेंगे विकसित मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं और ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कलेक्टर रोहित व्यास ने घोषणा की कि केशलापाठ देव स्थल को आस्था और पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। पहाड़ का इतिहास पांडव काल से जुड़ा हुआ माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडव पुत्र भीम ने इसी स्थान पर ग्रामीणों को असुरों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए बकासुर नामक राक्षस का वध किया था। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से यहां मन्नत मांगता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है।