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अडानी समूह के कोल माइंस के खिलाफ आक्रोश चरम पर, कलेक्ट्रेट के सामने रात भर डटे रहे ग्रामीण

माताएं दुधमुंहे बच्चों के साथ पूरी रात सड़कों पर, भूखे-प्यासे जारी रहा धरना प्रदर्शन

धरमजयगढ़। अडानी समूह के अंबुजा सीमेंट्स की प्रस्तावित कोल माइंस परियोजना के खिलाफ धरमजयगढ़ क्षेत्र में आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। पुरूंगा, साम्हरसिंगा और तेंदुमुड़ी ग्राम पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीणों ने बीते गुरुवार को रायगढ़ कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया और 11 नवंबर को होने वाली जनसुनवाई को तत्काल निरस्त करने की मांग की।प्रशासन से कोई ठोस आश्वासन न मिलने पर ग्रामीण भूखे-प्यासे धरने पर बैठ गए हैं। माताएं अपने दूधमुंहे बच्चों के साथ सड़क पर रात गुजारने को मजबूर रहीं।
ग्रामीणों ने बताया कि वे केवल चना-मुर्रा खाकर पूरी रात सड़कों पर बैठे रहे। वहीं आज सुबह नगर निगम प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को पोहा वितरित किया, लेकिन विरोध थमने के कोई आसार नहीं हैं।

‘पेसा’ का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं
कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के दौरान हाथों में बैनर और तख्तियां लिए ग्रामीणों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रशासन से स्पष्ट कहा- पेसा कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं कलेक्टर कार्यालय परिसर में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल की भारी तैनाती की गई थी। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण चल रहा है, लेकिन ग्रामीणों के चेहरे पर आक्रोश साफ झलक रहा था। वहीं इस जनआंदोलन को क्षेत्रीय विधायक लालजीत राठिया का भी लगातार समर्थन मिल रहा है।
पंचायत के प्रस्ताव को लेकर गुमराह करने का आरोप

ग्रामीणों ने बताया कि बीते 22 अक्टूबर को भी वे कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे,और जनसुनवाई निरस्त करने की मांग रखी थी। तब उन्हें बताया गया कि पंचायत प्रस्ताव प्रशासन को भेजा जा चुका है, किंतु जब ग्रामीणों ने तहसील कार्यालय से उस प्रस्ताव की प्रति मांग की, तो उन्हें “उपलब्ध नहीं” कहा गया। अब जिला प्रशासन का दावा है कि ऐसा कोई पंचायत प्रस्ताव मौजूद ही नहीं है। इस विरोधाभास ने ग्रामीणों के बीच भ्रम और असंतोष को और गहरा कर दिया है।

वहीं ग्रामीणों का कहना है, कि कंपनी द्वारा गुमराह किए जाने के साथ-साथ अब प्रशासन भी पारदर्शिता से दूर होता जा रहा है, जिससे किसानों और ग्रामीणों के बीच विश्वास की खाई और चौड़ीहोती जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है, “हम अपनी जल-जंगल-जमीन किसी कीमत पर नहीं देंगे!” और वहीं प्रशासन पर अब यह दबाव बढ़ गया है कि वह जल्द निर्णय ले, क्या जनसुनवाई रद्द होगी या विरोध और उग्र रूप लेगा, यह देखना बाकी है।

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