वैसे देश को मजबूर और परेशान तो करप्शन की दीमक ने भी कर रखा है। एक बार स्विस बैंक के एक डायरेक्टर ने कहा था कि भारतीय लोग गरीब हैं लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा है। ये थ्योरी छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला से आई भ्रष्टाचार की तस्वीरों से क्लियर हो गई। कोरबा में एक रोजगार सचिव का घर किसी खजाने से कम नहीं। ये सिर्फ भ्रष्टाचार का एक मामला नहीं बल्कि हमारे सिस्टम में जड़ तक फैले दीमक की कहानी है.
दरअसल ये फोटो कोरबा जिला के ग्राम पंचायत लबेद में पदस्थ रोजगार सहायक राजू पटेल के घर का है, हाल ही में नव निर्मित ये घर किसी खजाने से कम नहीं है लग्जरी सुविधाओं से लैश ये घर कोरबा के लोगों को सोचने पर मजबूर कर दे रहा की आखिर कोई शख्स रोजगार सहायक की नौकरी कर ये आलीशान राज महल कैसे बना सकता है ।
जब ये तस्वीर कोरबा के लोगों ने रायपुर में खबर छत्तीसगढ़ के दफ्तर में भेजी तो हमारी टीम की भी लालसा ये जानने के लिए बढ़ गई कि आखिर कोई शख्स मामूली रोजगार सहायक की नौकरी कर किसी विधायक या सांसद के घर से भी ज्यादा आलीशान घर कैसे बना सकता है । मन में जगी लालसा और खबर के तह तक जाने की उत्तेजना हमें कोरबा के ग्राम पंचायत लबेद के आश्रित ग्राम कांशीपनी की और ले गई, जहां रोजगार सहायक साहब का ये आलीशान घर है गांव के लोगों ने पूछताछ में बताया कि साहब के पास पुश्तैनी खेतिहर जमीनें तो बहुत है पर साहब ने एक भी जमीन बेची नहीं है पुस्तैनी संपति बेच कर घर बनाने का सवाल ही नहीं ग्रामीणों ने तो यह भी बताया कि साहब ने जमीन बेची नहीं जा बल्कि लबेद, रामभांटा, जामपानी जैसे जगहों में और जमीनें ली है । खबर की और सत्यता जानने हमने पंचायत मुख्याल लबेद गांव की और कदम बढ़ाया वहां जम हमने लोगों से बात की तो दबे जबान लोगों ने बताया कि साहब ने भ्रष्टाचार कर गरीबों का पैसा ढकार कर करोड़ों का शीश महल बना लिया ।
अब ये घर रोजगार सहायक की मेहनत की कमाई का है, या पुस्तैनी संपति का, या भ्रष्टाचार से आए काली कमाई का, इस बात का पता तो तब चलेगा जब खबर छत्तीसगढ़ की ये खबर सरकार की जांच एजेंसियों ED, ID के पास पहुंचेगी और जांच एजेंसी की अधिकारियों के कदम इस आलीशान महल के चौखट पर पड़ेंगे....