रायगढ़ शहर के बीच बसे 'निकले महादेव' मंदिर है. आस्था के इस केंद्र में लोग दूर-दूर से दर्शन को पहुंचते हैं. सावन के महीने में यहां कोरोना महामारी के डर से लोगों की भीड़ नहीं देखने को मिली. करीब 200 साल पुराने इस मंदिर की अपनी खास मान्यताएं हैं. ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में आकर जो भी मन्नतें मांगी जाती है, पूरी हो जाती हैं.
यह शिवालय लोगों की आस्था का केंद्र है. सावन के हर सोमवार यहां भक्त पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. पहले स्थानीय बताते हैं कि वे कई साल से इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं. ऐसा माना जाता है कि यहां भोले शंकर के दरबार में मांगी हुई सभी मन्नतें पूरी हो जाती है.
पुजारी ने बताया मंदिर का इतिहास
बरसों से मंदिर की पूजा करते आ रहे पुजारियों के परिवार के सदस्य बताते हैं कि जिस जगह पर अभी शिव जी का मंदिर है, वहां तालाब हुआ करता था जहां कार्तिक दास भारत नाम का व्यक्ति नहाने जाया करता था. पुजारी ने बताया कि करीब 200 साल पहले कार्तिक दास भारत नाम को सपना आया था कि 'निकले महादेव' यहां पर जमीन से निकले हुए हैं. जिसके बाद पहले एक छोटा गुबंदनुमा मंदिर बनाया गया, जिसके 100 साल बाद भव्य मंदिर का निर्माण किया गया. पुजारी ने बताया कि सामान्य दिनों में यहां सैकड़ों लोग दर्शन को आते थे, वहीं महाशिवरात्रि और सावन के महीने में श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में होती है.
मंदिर की मान्यता को लेकर पुजारी बताते हैं कि 'निकले महादेव' मंदिर के पीछे पीपल पेड़ है, जिस पर नारियल बांधने से हर मनोकामना पूरी होती है.