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कोरोना में बेसहारा हुए बच्चों की 2 साल से फ्री शिक्षा बंद, रिजल्ट-टीसी के लिए स्कूल वाले मांग रहे रुपए

CG News: यह दर्द उन माताओं का है, जिन्होंने कोविड में अपने पति को खोया। सरकार ने इन्हें सहारा देते हुए महतारी दुलार योजना के अंतर्गत इनके बच्चों को निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था तो की, लेकिन पिछले दो साल से यह व्यवस्था भी गुमनाम अंधेरे में खोई हुई नजर आ रही है। बच्चों के प्रवेश के लिए स्कूल को मिलने वाली फीस पिछले दो साल से नहीं मिली है, जिसका खामियाजा बच्चों के साथ उनके घरवालों को भी भुगतना पड़ रहा है।

स्कूल संचालक पैरेंट्स के साथ अच्छा व्यवहार

पिछले दो साल में लगभग 20 करोड़ रुपए देने हैं, लेकिन अब तक नहीं दिया गया है। वहीं, सभी छात्र-छात्राओं को 500 और हजार रुपए छात्रवृत्ति भी दी जाती थी, ये व्यवस्था भी बंद है। पालकों की स्थिति ऐसी है कि उन्हें स्कूल से भी बेइज्जत होना पड़ रहा है। स्कूल संचालक पैरेंट्स के साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर रहे हैं।
बच्चों की खातिर इनकी मां स्कूल और शिक्षा विभाग के ऑफिस घूम-घूम कर परेशान है, लेकिन पिछले दो साल से ही अधिकारियों द्वारा एक बात कहीं जा रही है कि भुगतान प्रक्रियाधीन है, जल्द हो जाएगा। जानकारों की मानें तो स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से इसमें कुछ बदलाव किए गए हैं, लेकिन इस पर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। इस बात को भी छु़पाने की कोशिश की जा रही है।

ऑफिस में किसी को पता नहीं, क्या होगा?

बच्चों के पैरेंट्स ने बताया कि हम लगातार डीईओ ऑफिस के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी को यह नहीं पता कि आगे क्या होगा। हर बार अधिकारी यहीं कहते है कि भुगतान की प्रक्रिया जारी है पैसे जल्द मिल जाएंगे। उन्होंने बताया कि ऐसी बातें पिछले दो साल से सुन रहे हैं, लेकिन अधिकारियों के पास इसके अलावा और कोई जवाब ही नहीं है।

बच्चों को मिलने वाली छात्रवृत्ति भी बंद

कोरोना की वजह से बेसहारा हुए बच्चों की फ्री शिक्षा की सुविधा देने का सरकार ने ऐलान किया था कि इनके लिए शिक्षा की व्यवस्था के साथ ही पहली से आठवीं तक के ऐसे बच्चों को 500 रुपए प्रतिमाह और 9वीं से 12वीं तक के बच्चों को एक हजार रुपए प्रतिमाह की छात्रवृत्ति भी दी जाएगी, लेकिन यह व्यवस्था भी पिछले दो साल से बंद है। जानकारी के अनुसार, पहले तीन साल तक तो पैसे मिले हैं, लेकिन उसके बाद कोई भी पैसा अकाउंट में नहीं आया।

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