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30 घंटे सेअधिक समय से अंधेरे में डूबा अस्पताल

जानकारी के अनुसार बिजली बंद होने पर अंधेरे व गर्मी से घबराकर अस्पताल में भर्ती मरीजों के स्वजनों के द्वारा मरीजों को अस्पताल से बाहर दूसरे जगह इलाज के लिए ले गए। स्वजनों ने आरोप लगाया कि लगातार मरीज परेशान होते रहे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने मरीजों की कोई सुध नहीं ली। एक मरीज केस्वजन ने बताया कि इस अस्पताल में रोज दर्जनों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।


सक्ती : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले 30 घंटे से अधिक समय से बिजली बंद होने से अस्पताल में अंधेरा छाया हुआ है। जिसके कारण चिकित्सकीय कार्य प्रभावित हुआ। वहीं मरीजों और उनके स्वजन को अंधेरे में परेशानियों के साथ रात गुजारना पड़ा।

बिजली बंद होने से डाक्टरों के कमरे से लेकर मरीजों के वार्ड में अंधेरा छाया हुआ । इससे अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जैसी महत्वपूर्ण जांच नहीं हो सके क्योंकि ये उपकरण बिना बिजली के काम नहीं करते। अंधेरे में कई डाक्टर और चिकित्सा कर्मी मरीजों का इलाज करते हुए नजर आए। वहीं अंधेरे के चलते कई मरीजों के उपचार में देरी हुई जिससे उन्हें परेशानी हुई

इससे अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जैसी महत्वपूर्ण जांच नहीं हो सके क्योंकि ये उपकरण बिना बिजली के काम नहीं करते। अंधेरे में कई डाक्टर और चिकित्सा कर्मी मरीजों का इलाज करते हुए नजर आए। वहीं अंधेरे के चलते कई मरीजों के उपचार में देरी हुई जिससे उन्हें परेशानी हुई। अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे एक मरीज ने बताया कि उसने काफी देर से अस्पताल में उपचार के लिए इंतजार किया।

लेकिन बिजली नहीं आने के कारण उसका उपचार नहीं हो सका। अब उसे दोबारा अस्पताल आना पड़ेगा। दूसरे मरीज ने कहा कि उसे हाथ में चोट आई है और एक्स - रे कराना है, लेकिन बिजली नहीं होने के कारण एक्स - रे नहीं हो पाया। उसे अब दोबारा अस्पताल आना पड़ेगा। जब इस संबंध में बिजली विभाग से संपर्क किया गया तो लाइनमेन निर्मलकर ने बताया कि सूचना मिलने पर उनकी टीम अस्पताल पहुंची थी। पहुंचकर सुधार कार्य किया है।

ट्रांसफार्मर में आए फाल्ट और अंडर ग्राउंड केबल में आई खराबी के कारण विद्युत व्यवस्था बाधित हुई है, जिसे सुधारने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिस ट्रांसफार्मर में खराबी आई है वह चारों ओर से बबूल की झाडिय़ों से घिरा हुआ है, जिससे सुधार कार्य करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन को इस बारे में पूर्व में भी अवगत कराया गया था, लेकिन हालत जस की तस बनी हुई है।

ट्रांसफार्मर के पास ही फेंक देते हैं मेडिकल कचरा

अस्पताल प्रबंधन द्वारा यहां मेडिकल कचरे को फेंक दिया जाता है, जिससे उठ रही दुर्गंध के कारण यहां बिजली विभाग के कर्मचारियों को सुधार कार्य करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने झाड़ा पल्ला

वहीं अस्पताल प्रबंधन से संपर्क करने पर थवाईत ने विद्युत विभाग को सुधार कार्य किए जाने की सूचना दिए जाने की बात कहकर विस्तृत जानकारी के लिए सीएमएचओ से संपर्क करने की बात कही और अपने कर्तव्य से इतिश्री कर ली। वहीं जब इस संबंध में बीएमओ सूरज राठौर से संपर्क करने का प्रयास किया गया मगर उन्होंने काल रिसीव नहीं किया।

केबल की व्यवस्था नहीं कर सका अस्पताल प्रबंधन

ट्रांसफार्मर जिस तरह बबूल की कंटीली झाडिय़ों से घिरा हुआ है, उसे देखकर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि ट्रांसफार्मर में आई खराबी को दूर करने में कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा होगा। वहीं विद्युत विभाग के अधिकारी कर्मचारियों का कहना है कि उनके द्वारा दो बार ट्रांसफार्मर में सुधार कार्य किया गया है, बावजूद इसके अंडर ग्राउंड केबल कनेक्शन में आए फाल्ट की वजह से विद्युत व्यवस्था बाधित हुई है। अस्पताल प्रबंधन को सूचित करने के बावजूद केबल की व्यवस्था नहीं किए जाने से अब तक विद्युत व्यवस्था को बहाल नहीं किया जा सकता है। इस परेशानी का खामियाजा सिर्फ मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है।

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