क्या है प्रदर्शन की वजह?
दरअसल, 17 मई को सतनामी समुदाय द्वारा पूजित 'जैतखंभ' को अज्ञात लोगों ने तोड़ दिया था, जिससे समुदाय में व्यापक आक्रोश फैल गया। यह 'जैतखंभ' बलौदा बाज़ार ज़िले के गिरौदपुरी धाम में पवित्र अमर गुफा के पास स्थित है। इस मामले को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चिंताजनक बताया है, जबकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने DGP को तलब किया है।
इसी मांग को लेकर सतनामी समाज ने 10 जून को कलेक्टर और एसपी कार्यालय घेराव का आयोजन किया था. समाज ने अपने इस घेराव को लेकर एक बयान में लिखा कि पहले भी धरमपुरा (कवर्धा), जरहागांव (बिलासपुर) जैसी जगहों पर जैतखाम और सामाजिक भवन को तोड़ा गया था. सतनामी समाज का ये भी आरोप है कि उनके जनप्रतिनिधि और कर्मचारियों के साथ प्रशासन जातिगत शोषण और उपेक्षा कर रहा है.
दैनिक भास्कर एक रिपोर्ट बताती है कि सतनामी समाज के लोग हर गांव किसी चबूतरे या प्रमुख जगह पर खंभे में सफेद झंडा लगाते हैं. जैतखाम मूलरूप से इसी झंडे का नाम है और इस समाज का प्रतीक है. सबसे बड़ा जैतखाम गिरौदपुरी में है, जिसकी ऊंचाई करीब 77 मीटर है.
