10 जून को एक भीड़ ने ज़िला कलेक्ट्रेट में तोड़-फोड़ की और बिल्डिंग में आग लगा दी थी। इस घटना में 25 से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। प्रदर्शनकारी इतने उग्र थे कि उन्होंने CCTV कैमरे भी तोड़ दिए। यहां स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है।
रायपुर: छत्तीसगढ़ के बलौदा बाज़ार में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। पुलिस ने हिंसा और आगजनी के आरोप में 60-70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। 10 जून को इस भीड़ ने ज़िला कलेक्ट्रेट में तोड़-फोड़ की और बिल्डिंग में आग भी लगा दी थी। इस पूरी घटना में 25 से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। प्रदर्शनकारी इतने उग्र थे कि उन्होंने CCTV कैमरे भी तोड़ दिए थे।
क्या है प्रदर्शन की वजह?
दरअसल, 17 मई को सतनामी समुदाय द्वारा पूजित 'जैतखंभ' को अज्ञात लोगों ने तोड़ दिया था, जिससे समुदाय में व्यापक आक्रोश फैल गया। यह 'जैतखंभ' बलौदा बाज़ार ज़िले के गिरौदपुरी धाम में पवित्र अमर गुफा के पास स्थित है। इस मामले को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चिंताजनक बताया है, जबकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने DGP को तलब किया है।
अचानक उग्र हो गई भीड़
जानकारी के अनुसार, सतनामी समाज के लोग CBI जांच की मांग को लेकर बलौदा बाज़ार पहुंचे थे। विरोध प्रदर्शन के दौरान दशहरा मैदान में एकत्रित भीड़ अचानक उग्र हो गई। सतनामी समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट को घेर लिया और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। CCTV कैमरे तोड़े जाने के बाद ड्रोन से निगरानी की गई और ड्रोन फुटेज के आधार पर लोगों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है।
