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खरसिया विधानसभा का इतिहास , भाजपा के पितृपुष का शहर क्यों है कांग्रेस का अभेद गढ़ ?

 भाजपा के पितृ पुरुष की नगरी फिर भी क्यों है कांग्रेस का गढ़ ? जाने खरसिया विधानसभा का इतिहास....


खरसिया विधानसभा भाजपा के पितृ पुरुष कहे जाने वाले लखीराम अग्रवाल की कर्मभूमि है। यह विधानसभा कांग्रेस के कद्दावर नेता अर्जुन सिंह के चुनाव लड़ने के बाद पहली बर चर्चा में आई थी। वर्तमान में यहां से कांग्रेस नेता उमेश पटेल विधायक हैं।

छत्तीसगढ़ में 2018 के विधानसभा चुनाव में खरसिया विधानसभा सीट (क्र.18) से कांग्रेस के उमेश पटेल ने 94,201 वोट पाकर जीत दर्ज की थी। उन्होंने अपने निकटवर्ती प्रतिद्वंदी बीजेपी के ओपी चौधरी को हराया, जिन्हें 77,234 मत मिले थे।


खरसिया || छत्तीसगढ़ विधानसभा सीट छत्तीसगढ़ की सबसे हॉट सीट मानी जाती हैं , आजादी के बाद से आज तक यंहा कांग्रेस काबिज है , कांग्रेस के इस अभेद गढ़ को भेदने भाजपा के कई बड़े बड़े दिग्गजों ने अपनी किस्मत आजमाई है परंतु कांग्रेस के इस अभेद गढ़ को भेद पाने में भाजपा असमर्थ रही । अविभाजित मध्यप्रदेश के समय सम्पूर्ण राज्य ( अविभाजित मध्यप्रदेश ) की भाजपा पार्टी की राजनीति यहीं से संचालित होती थी ।

1977 में बना खरसिया विधानभा तब से यहां कांग्रेस काबिज

अविभाजित मध्यप्रदेश के समय जब सन 1977 में खरसिया विधानसभा सीट बनी तब उस विधानसभा चुनाव में कांगेस के लक्ष्मी पटेल और जनता पार्टी से डॉ शत्रुधन पटेल के बीच चुनाव हुआ जिसमे कांग्रेस के शत्रुधन पटेल ने अपनी जीत का परचम लहराया और 1988 तक लगातार खरसिया विधानसभा से विधायक रहे , 1988 में शत्रुधन सिंह जी ने अर्जुन सिंह के लिए अपनी सीट से इस्तीफा दिया , यंहा 1988 में उपचुनाव हुआ और इस उपचुनाव में कांग्रेस के अर्जुन सिंह के खिलाफ भाजपा ने दिलीप सिंह जूदेव को चुनाव में उतारा और इस उपचुनाव को जीत कर अर्जुन सिंह जी ने जीत हासिल की और खरसिया में कांग्रेस का वर्चस्व कायम रहा । इसके बाद कांग्रेस से नन्दकुमार पटेल  ने 1990 के चुनाव में भाजपा के पितृपुरुष माने जाने वाले स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल को हराकर जीत हासिल की फिर 1990 से 2008 तक लगातार पांच बार जीत हासिल करके विधायक सीट कब्जे में रखी । 25 मई को झीरम घाटी के नक्सली हमले में उनकी मौत हो गई । 2013 के विधानसभा चुनाव कांग्रेस से शहीद नंदकुमार के बेटे उमेश नंदकुमार पटेल को पार्टी ने टिकट दिया और उन्होंने खरसिया विधानसभा में अपनी जीत का परचम लहरा दिया , इसके बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में उमेश पटेल का सामना करने भाजपा ने कलेक्टरी की नौकरी छोड़ राजनीति में अपनी किस्मत आजमाने आए ओमप्रकाश चौधरी के दम पर खरसिया में कांग्रेस के किले को ध्वस्त करने का निर्णय लिया , पर 2018 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को करारी शिकस्त मिली । अब 2023 के चुनाव के लिए भाजपा ने महेश साहू को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है वही कांग्रेस से उमेश पटेल की टिकट तय मानी जा रही है , अब देखना ये होगा की क्या महेश के दम पर भाजपा खरसिया जीत पाएगी ।


कौन है महेश साहू....


महेश साहू 2023 विधानसभा में खरसिया से भाजपा प्रत्याशी हैं , खरसिया के सरवानी के महेश साहू एक किसान परिवार से आते हैं पिछले एक दशक से महेश साहू भाजपा से जुड़े हुए हैं , आपको ये भी बता दें की भाजपा प्रवेश से पहले महेश साहू कांग्रेस पार्टी में थे....


खरसिया एक नजर


* खरसिया विधानसभा सीट 1977 बनी।

* पहले विधायक कांग्रेस के लक्ष्मी प्रसाद पटेल बने ।

* 1988 में उपचुनाव में कांग्रेस के अर्जुन सिंह जीते ।

* 1900 से 2013  तक स्वर्गीय नंदकुमार पटेल विधायक रहे ।

* 2013 से अब तक उमेश पटेल विधायक हैं ।

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