एसडीएम करुण डहरिया का नाम छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक गलियारों में कोई नया नहीं है। वर्ष 2019 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा के इस अधिकारी की छवि एक 'विवादित अफसर' के रूप में रही है, जिनका करियर रिश्वतखोरी से लेकर मारपीट के आरोपों तक सिमटा रहा है।
बलरामपुर। कुसमी में एक आदिवासी ग्रामीण की मौत और दो अन्य के घायल होने के बाद सुर्खियों में आए एसडीएम करुण डहरिया का नाम छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक गलियारों में कोई नया नहीं है। वर्ष 2019 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा के इस अधिकारी की छवि एक 'विवादित अफसर' के रूप में रही है, जिनका करियर रिश्वतखोरी से लेकर मारपीट के आरोपों तक सिमटा रहा है।
रिश्वत के दाग और जेल की हवा: गरियाबंद का वो कांड
करुण डहरिया का भ्रष्टाचार से रिश्ता काफी पुराना है। वर्ष 2022 में जब वे गरियाबंद में जनपद सीईओ के पद पर तैनात थे, तब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उन्हें उनके दफ्तर में ही 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा था।
मामला: एक बोरवेल खनन का बिल पास करने के बदले उन्होंने पैसों की मांग की थी।
परिणाम: इस कार्रवाई के बाद उन्हें जेल जाना पड़ा और शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया था। हालांकि, जमानत पर बाहर आने के बाद उनकी बहाली हो गई और वे फिर से मलाईदार पदों पर काबिज हो गए।
जब छात्रों को दी थप्पड़ मारने की धमकी
जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ में एसडीएम रहते हुए भी डहरिया का तानाशाही रवैया सामने आया था। वहां अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपने पहुंचे मासूम स्कूली छात्रों को ज्ञापन लेने के बजाय उन्होंने थप्पड़ मारने की धमकी दी थी। इस घटना का वीडियो उस समय खूब वायरल हुआ था और सरकार की काफी किरकिरी हुई थी।
अवैध वसूली और लकड़ी तस्करी का 'खेल'
कुसमी एसडीएम के पद पर रहते हुए उन पर 6 लाख रुपये की अवैध वसूली का गंभीर आरोप लगा। आरोप था कि उन्होंने अवैध इमारती लकड़ी से लदे एक ट्रक को छोड़ने के एवज में यह मोटी रकम वसूली थी। इस मामले का एक ऑडियो भी वायरल हुआ था, जिसकी शिकायत एसीबी और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) तक पहुंची है।
इसके अलावा, बलरामपुर में ही अतिक्रमण हटाने के दौरान एक युवक का कॉलर पकड़कर मारपीट करने का आरोप भी उन पर लग चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे विरोध करने वालों को झूठे केस में फंसाने और जेल भिजवाने की धमकियां देने के लिए कुख्यात रहे हैं।