छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए एक बेहद भावुक मुहिम शुरू की है। रेडियो पर जब कोई भाई अपनी बहन को घर लौटने की गुहार लगाता है, तो वह पत्थर दिल भी पिघलने लगते हैं जिन्हें सालों से बंदूक की भाषा सिखाई गई है। बस्तर के घने जंगलों में सरकार आकाशवाणी के जरिए प्यार की लहरें पहुंचा रही है।
रायपुर: 'प्रिय बहन मासे, तुम किशोर अवस्था में घर छोड़कर पार्टी में शामिल हो गई थी। तब से मैंने तुम्हें नहीं देखा। मैं तुमसे हथियार डालने और घर लौटने की अपील करता हूं। हम सब तुम्हारी चिंता करते हैं।' सुकमा निवासी अनिल कुरमी का यह संदेश उनकी बहन के लिए है, जो माओवादी सरनेम 'क्रांति' का इस्तेमाल करती है। यह ऐसे दर्जनों संदेशों में से एक है जो वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों में प्रसारित हो रहे हैं।
आकाशवाणी पर गूंज रहे ऐसे संदेश
जहां मोबाइल के सिग्नल काम नहीं करते, वहां रेडियो की लहरें पहुंच जाती हैं। ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) दिन में दो बार माओवादियों के गढ़ों में सरकारी घोषणाएं नहीं, बल्कि घर की आवाजें प्रसारित कर रहा है। ये अपीलें, ज़्यादातर गोंडी भाषा में, परिवार, पुनर्वास और जंगल से परे जीवन की बात करती हैं। एक और अपील में कहा गया है, 'सब लोग मुख्यधारा में लौट आए हैं। सरकार पुनर्वास का लाभ दे रही है। तुम्हें भी वापस आ जाना चाहिए। घर पर जीवन बेहतर होगा।'
केंद्र ने तय कर दी है समयसीमा
अधिकारियों ने बताया कि अन्य रिकॉर्ड किए गए संदेशों में एक भतीजे द्वारा अपने चाचा से पोते-पोतियों के लिए आत्मसमर्पण करने की अपील भी शामिल है। केंद्र की 31 मार्च की देश से वामपंथी उग्रवाद (LWE) को खत्म करने की समय सीमा नज़दीक आने के साथ, छत्तीसगढ़ ने माओवादियों को आत्मसमर्पण के लिए मनाने हेतु एक अनोखी पहल शुरू की है। यह पहल उनके परिवारों द्वारा रिकॉर्ड किए गए भावनात्मक अपीलों के माध्यम से की जा रही है।
कहां प्रसारित हो रहीं अपील
यह अपीलें, छत्तीसगढ़ (जगदलपुर, सरायपाली और रायपुर), तेलंगाना (कोठागुडेम), आंध्र प्रदेश (विशाखापत्तनम), महाराष्ट्र (चंद्रपुर और गढ़चिरौली), ओडिशा (भवनपटना और बोलंगीर), और मध्य प्रदेश (बालाघाट और मंडला) के रेडियो स्टेशनों से नक्सल प्रभावित राज्यों में प्रसारित हो रही हैं।
इस टाइम पर होता है अनाउंसमेंट
बस्तर जैसे दूरदराज के माओवादी गढ़ों में, रेडियो सूचना का सबसे सुलभ और भरोसेमंद स्रोत बना हुआ है। प्रसारण 5 फरवरी को शुरू हुए और 25 फरवरी तक चलेंगे। ये प्रसारण हर दिन सुबह 9 बजे से 10 बजे और शाम 5 बजे से 6 बजे तक दो बार प्रसारित होंगे। अधिकारियों का कहना है कि इन समयों पर कैडरों के शाम को इकट्ठा होने या आवाजाही से ब्रेक लेने के दौरान रेडियो सुनने की संभावना बढ़ जाती है।