रायगढ़, । महज 10-12 किमी की रोड बनाना न तो प्रशासन के लिए मुश्किल है और न ही उद्योगों के लिए। फिर भी इतने सालों तक कीचड़ और डस्ट से भरी रोड पर चलने के लिए आधा दर्जन गांवों को छोड़ दिया। अब इतने सालों का गुस्सा फूटा है तो लोगों ने रोड ही ब्लॉक कर दी। तीन दिनों से गारे में चल रही आर्थिक नाकेबंदी का समाधान रविवार को निकला। चार दिनों में रोड की मरम्मत करने और 15 अक्टूबर से नई रोड का निर्माण करने की शर्त पर लोगों ने आंदोलन स्थगित किया।
हुकराडिपा से मिलूपारा रोड 12 किमी रोड की बदहाली को लेकर आधा दर्जन गांवों के लोग तीन दिनों से सड़क पर बैठे हैं। ग्रामीणों की सबसे बड़ी तकलीफ यह है कि उनके पुरखे भी इसी गांव में रहते थे, वे भी रह रहे हैं। उन्होंने किसी और की जमीन पर कब्जा नहीं किया। कोयला खदानों को चलाना देश की जरूरत हो सकती है लेकिन इसके लिए गांवों को बर्बाद कर देना कहां तक सही है। इन गांवों के नीचे जमीन पर मौजूद कोयले को निकालने के लिए देश की कई दिग्गज कंपनियां लगी हुई हैं।
गांवों के बीच से गुजर रही सडक़ों से होकर वाहन निकलते हैं। इसके बदले सरकार को अरबों रुपए की रॉयल्टी, प्रीमियम राशि, डीएमएफ और सीएसआर राशि मिलती है। कोयला परिवहन के साथ-साथ अच्छी सडक़ें भी तो होनी चाहिए। बारिश के दिनों में रोड पर कीचड़ होता है और बाकी समय में डस्ट।
शुक्रवार से ग्रामीण गारे में स्कूल के सामने बैठे हैं। बच्चे-बूढ़े सभी आंदोलन में शामिल हो चुके हैं। सराईटोला, पाता, मुड़ागांव, गारे, सरसमाल आदि गांवों के लोग भी यहां पहुंच रहे हैं। आर्थिक नाकेबंदी के कारण हिंडाल्को, सारडा, जिंदल पावर, अंबुजा सीमेंट, सीएसपीडीसीएल की गाडिय़ां रुक गई हैं। इस रोड को बनाने से पीडब्ल्यूडी इंकार कर चुका है।
कंपनियां कोई ठोस कार्ययोजना लेकर नहीं आतीं। रविवार शाम को एक अबार फिर एसडीएम समेत अन्य अधिकारियों ने ग्रामीणों से चर्चा की। काफी सोच-विचार के बाद निर्णय लिया गया कि चार दिनों के अंदर कंपनियां रोड की मरम्मत करेंगी। साथ ही 15 अक्टूबर से नई सड़क का निर्माण किया जाएगा। इस शर्त पर ग्रामीणों ने आंदोलन को स्थगित किया।
लिबरा में किराए के मकान में रह रहे बच्चे
ग्रामीणों ने बताया कि रोड खराब होने के कारण स्कूल जाने के लिए दस बच्चों ने एक वैन उपलब्ध कराने की मांग की थी। लेकिन उद्योगों ने मना कर दिया। इस रोड पर रोज स्कूल जाने में परेशानी होती है इसलिए बच्चे लिबरा में किराए के मकान में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। इतनी मुश्किल में रह रहे ग्रामीणों की तकलीफ को कभी महसूस नहीं किया गया। डीएमएफ से प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र में चौड़ी सडक़ क्यों नहीं बनाई गई, यह सवाल हर ग्रामीण कर रहा है।
इससे पहले भी रहे कांग्रेस के विधायक
कांग्रेस विधायक विद्यावती सिदार ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों का साथ दिया। लैलूंगा में इसके पहले भी कांग्रेस के विधायक चक्रधर सिंह सिदार ही थे। उन्होंने कभी ग्रामीणों की तकलीफ जानने की कोशिश नहीं की। अब राजनीतिक परिस्थिति अलग है इसलिए विद्यावती पहुंच रही हैं। इस रोड से होकर हिंझर, उरबा, मिलूपारा, कोडकेल, गारे, खम्हरिया, सेमीजोर, पेलमा आदि गांवों के लोग तमनार आते-जाते हैं।
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