छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जंगल किनारे बसे गांवों के किसान अब खेती से दूर हो रहे हैं। इसका कारण वन्यप्राणी हैं। क्योंकि जंगली सुअर और खरगोश जंगल से खेत पहुंचकर सब्जी और धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। धान की फसल तैयार होने पर सैकड़ों की संख्या में बंदर भी खेतों पर आ जाते हैं।शहर से करीब 10 किमी की दूरी पर स्थित टारपाली गांव की यह स्थिति है, जो पहाड़ और जंगल के किनारे बसा हुआ है। यहां के कई किसान अब मूंग उड़द की खेती नहीं करते। धान की खेती अब मानों उनकी मजबूरी बनी हुई है।
करनी पड़ती है रखवाली
गांव के किसानों ने बताया कि मूंग और उड़द को बंद कर अब सिर्फ धान की खेती कर रहे हैं। सुबह से लेकर रात तक उन्हें खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। वे खेतों के पास न आए इसके लिए कई तरह की आवाजें भी निकालते है। फिर भी देर रात जंगली सुअर खेतों तक पहुंचते हैं। फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।
खेती किसानी छोड़ मजदूरी कर रहे
यह भी बताया जा रहा है कि, टारपाली गांव के कई ग्रामीण ऐसे हैं, जो पहले तो खेती करते थे, लेकिन वन्यप्राणियों अब खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जिस कारण वे खेती का काम छोड़ शहर में आकर मजदूरी कर रहे हैं।
काफी तादाद में जंगली सुअर
कभी कम तो कभी ज्यादा नुकसान वन्यप्राणी करते रहते हैं। हर दिन का यह हाल है। ऐसे में ग्रामीण भी इसकी शिकायत वन विभाग में नहीं करते हैं। जिस कारण मुआवजा भी इन्हें नहीं मिल पाता है।यहां बंदर और जंगली सुअर की संख्या काफी है।
नहीं आता है आवेदन
टारपाली के परिसर रक्षक रोहित सिदार ने बताया कि, मुआवजे के लिए आवेदन आएगा और ग्रामीण जानकारी देंगे, तो जरूर प्रक्रिया की जाएगी। पहले भालू भी आते थे, पर अभी वे नजर नहीं आते। जंगली सुअर रात में पहाड़ से उतरते हैं
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