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छत्तीसगढ़ में हाथियों ने 25 दिन में 9 को मारा:बचने के लिए रात रातभर जग रहे गांववाले; गा रहे रामायण

 छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले का सांकरा गांव... रात के 8 बजे का वक्त...कुछ लोग हारमोनियम, ढोलक और तबला जैसे वाद्ययंत्र लेकर गांव के ही चौपाल पर बने एक कमरे में पहुंचे। ये मंडली किसी धार्मिक आयोजन के लिए नहीं बल्कि हाथियों से बचने के लिए रातभर जागकर भजन करेगी।

छत्तीसगढ़ में पिछले 25 दिनों में हाथी के हमले से 9 लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में हाथियों की आमद के बाद गांव में हालात किस तरह के होते हैं ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम प्रदेश के दो अलग-अलग जगहों पर पहुंची। पहली टीम गरियाबंद के सांकरा और दूसरी रायगढ़ के बंगुरसिया गांव पहुंची। 



सूचना, सूचना, सूचना….सांकरा के समस्त ग्रामवासियों को सूचित किया जाता है कि आपके वन क्षेत्र में तीन दंतैल हाथी विचरण कर रहे हैं। कृपया जंगल, खेत-खलिहान की ओर ना जांए और अगर कहीं हाथियों का दल दिखाई दे तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें।


ये मुनादी सांकरा गांव में वन विभाग का कर्मचारी हाथ में लाउड-स्पीकर लिए कर रहा था। दरअसल यहां पिछले 2 दिनों से 3 दंतैल हाथियों का दल आसपास के इलाके में घूम रहा है और अब गांव पास पहुंच गया है। गांव में रहने वालों लोगों के लिए ये एक्टिविटी कोई नई बात नहीं थी। पहले भी कई बार हाथियों की आमद हो चुकी है, लिहाजा लोगों को ग्रामीणों चावल, धान से लेकर अन्य सामान को सुरक्षित रखने के लिए भी कहा जा रहा था।


इनके साथ वन विभाग के डिप्टी रेंजर वीरेंद्र ध्रुव अपनी टीम के साथ मौजूद थे। गांव के भीतर अगर हाथी की आमद होती तब पूरी टीम को ही इस सिचुएशन को कंट्रोल करना होता है। उन्होंने बताया कि ‘गांव के पास हाथी पहुंचने से पहले ही कई बार मुनादी करा दी गई है लेकिन मॉनिटरिंग के लिए देर रात तक जागना होता है।


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