ट्रेनों की लेटलतीफी की समस्या यात्रियों के लिए नई नहीं है। सालभर से ट्रेनों के परिचालन की स्थिति इसी तरह है। यात्री इसलिए सबसे ज्यादा परेशान है, क्योंकि वह समय में मंजिल पर नहीं पहुंच पाते।
बिलासपुर। रविवार का दिन ट्रेन के यात्रियों के लिए परेशानी भरा रहा। हावड़ा से छूटकर मुंबई, पुणे, गुजरात जाने वाली ट्रेनें छह से 12 घंटे विलंब रहीं। ऐसे में यात्री बार-बार पूछताछ केंद्र में जाकर ट्रेन के आगमन की जानकारी लेते रहे। इन सबके बीच काउंटर पर बैठा कर्मचारी हमेशा की तरह लेटलतीफी की वजह नहीं बता सका। परेशान यात्रियों में कई ऐसे भी थे, जिन्हें बेहद जरूरी काम से जाना था। ऐसे यात्री पूरे समय स्टेशन में हड़बड़ाते नजर आए।
ट्रेनों की लेटलतीफी की समस्या यात्रियों के लिए नई नहीं है। सालभर से ट्रेनों के परिचालन की स्थिति इसी तरह है। यात्री इसलिए सबसे ज्यादा परेशान है, क्योंकि वह समय में मंजिल पर नहीं पहुंच पाते। बीच में कुछ सुधार हुआ था। लेकिन स्थिति पहले की तरह हो गई है। रविवार को भी यात्रियों को इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ा। एसी यात्री प्रतीक्षलाय, द्वितीय श्रेणी प्रतीक्षालय और प्लेटफार्म ऐसी कोई जगह नहीं थी, जब यात्री न बैठे हो। उनके चेहरे पर साफ परेशानी नजर आ रही थी। कुछ यात्री तो पूछताछ केंद्र में जाकर वजह जानने का प्रयास भी करते रहे। लेकिन, उन्हें यह कह दिया गया कि प्रारंभिक स्टेशन से ही ट्रेन विलंब से छूटी है। इस लेटलतीफी का असर विपरीत दिशा से भी रहेगी। दरअसल विलंब से जाने वाली ट्रेनें देर से बिलासपुर पहुंचेंगी। यात्रियों का कहना है कि रेलवे यात्रियों को चौतरफा परेशान कर रही है। एक तो अधिकांश दिशा की ट्रेनें रद हैं। ऐसे में जो चल रही हैं, उनकी चाल भी पूरी तरह बिगड़ी हुई है।
