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बर्रा कोल माइन्स का विरोध, बैठकों का दौर जारी:ग्रामीण बोले-अपनी जमीन नहीं देना चाहते, तहसीलदार ने कहा..


 

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में छोटे बड़े सैकड़ों उद्योग स्थापित हैं। अब जिले के खरसिया विधानसभा के बर्रा कोल ब्लाॅक का आवंटन वेदांता एल्युमिनियम को किया गया है। ऐसे में कुर्रू सहित कई गांव के लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।

ग्रामीणों का साफ कहना है कि वे अपनी जमीन नहीं देना चाहते। ऐसे में ग्रामीणों के बीच बैठक का भी दौर चल रहा है। पूर्व में कुर्रू में ग्रामीणों के बीच मिटिंग हुई और बर्रा कोल ब्लाॅक को लेकर बातचीत की गई। ग्रामीणों ने बताया कि कंपनी के कर्मचारी क्षेत्र में कोयला खनन सर्वे कर रहे हैं। बर्रा और कुर्रू नगोई के बीच मशीन लगाकर सर्वे किया जा रहा है।


कुर्रू नगोई बांध के पास सर्वे।

ये गांव होंगे प्रभावित

ग्रामीणों ने बताया कि बर्रा कोल ब्लाॅक के कारण करीब 7 गांव प्रभावित होंगे। इसमें बर्रा, जोबी, फरकानारा, कुर्रू, नगोई, मिनगांव और काफरमार शामिल हैं। इसमें सबसे ज्यादा प्रभाव बर्रा और जोबी गांव को पड़ेगा।

लगातार हो रही बैठक

ग्रामीणों ने बताया कि वेदांता एल्युमिनियम के बर्रा कोल ब्लाॅक को लेकर ग्रामीणों के बीच लगातार बैठक हो रही है। अब तक कुर्रू, फराकानारा, नगोई, मिनगांव, काफरमार में ग्रामीणों ने बैठक की है।सभी बर्रा कोल ब्लाॅक का विरोध कर रहे हैं।



जंगल और जमीन का नुकसान

ग्रामीणों का कहना है कि इस कोल ब्लाॅक में जंगल और ग्रामीणों की जमीन प्रभावित होगी। कई पेड़ भी काटे जा सकते हैं। जिस कारण में जमीन नहीं देना चाहते।

अभी सर्वे चल रहा

इस संबंध में खरसिया तहसीलदार शिव डनसेना से जब चर्चा की गई, तो उन्होंने बताया कि अभी सिर्फ सर्वे हो रहा है। इससे किसी का मकान नहीं टूटेगा। कोयला खदान की बात सूनकर ग्रामीण घबरा गए थे, लेकिन अब सहमत हैं।

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