CG विधानसभा में दवा खरीदी पर घमासान: 6.89 करोड़ की खरीद पर भ्रष्टाचार के आरोप, सरकार ने कहा- गुणवत्ता जांच में दवा मानक पर खरी
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सवाल को आगे बढ़ाते हुए CGMSC की दवा खरीदी पर सरकार को घेरा। विपक्ष का आरोप था कि गुजरात में प्रतिबंधित या ब्लैकलिस्टेड दवा को छत्तीसगढ़ में "अनकोटेड" बताकर करोड़ों रुपये में खरीदा गया। कांग्रेस ने इस पूरे मामले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
इस पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि गुजरात में जिस दवा या उत्पाद को लेकर कार्रवाई हुई थी, छत्तीसगढ़ में खरीदी गई दवा उससे अलग उत्पाद थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवा की आपूर्ति के बाद नियमानुसार उसकी प्रयोगशाला में गुणवत्ता जांच कराई गई थी और सभी नमूने निर्धारित मानकों पर खरे पाए गए। जांच रिपोर्ट संतोषजनक होने के बाद ही दवा को स्वास्थ्य व्यवस्था में उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि वर्तमान खरीद प्रक्रिया के अनुसार दवा की आपूर्ति से पहले गुणवत्ता परीक्षण कराने का कोई प्रावधान नहीं है। नियमों के तहत पहले दवा की सप्लाई ली जाती है और उसके बाद लैब टेस्टिंग की जाती है, जिसका इस मामले में पूरी तरह पालन किया गया।
हालांकि विपक्ष सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि किसी कंपनी या उसके उत्पाद को दूसरे राज्य में ब्लैकलिस्ट किया गया था, तो खरीद प्रक्रिया के दौरान अतिरिक्त सतर्कता क्यों नहीं बरती गई। विपक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग दोहराई।
इस मुद्दे को लेकर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक होती रही। सरकार ने दावा किया कि जनता के स्वास्थ्य से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया गया है और खरीदी गई दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं, जबकि विपक्ष ने दवा खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए मामले की गहन जांच की मांग की।