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कभी नंगे पांव जंगलों में चुना करते थे तेंदू पत्ता, अब अफसर की कुर्सी संभालेंगे 29 साल के अजय

छत्तीसगढ़ के अजय गुप्ता ने गरीबी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की है। जंगलों में तेंदू पत्ता और महुआ चुनकर परिवार का साथ देने वाले अजय ने मेहनत के दम पर UPSC में 452वीं और IFS परीक्षा में 91वीं रैंक हासिल की। स्कॉलरशिप से इंजीनियरिंग पूरी करने वाले अजय की सफलता आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।



छत्तीसगढ़ के जंगलों से निकली एक कहानी आज लोगों के दिल छू रही है। यह कहानी है रायगढ़ जिले के एक छोटे से गांव 'संबलपुरी' के रहने वाले अजय गुप्ता की। आज अजय ने वो मुकाम हासिल किया है जिसका सपना हर कोई देखता है, लेकिन वहां तक पहुंचने का रास्ता उनके लिए कांटों भरा था।

अजय का बचपन बाकी बच्चों जैसा नहीं था। जब दूसरे बच्चे खिलौनों से खेलते थे, तब अजय तपती धूप में अपने माता-पिता के साथ जंगलों में तेंदू पत्ता और महुआ चुनते थे। उनका पूरा परिवार इसी 'वनोपज' (Forest Produce) पर निर्भर था। तंगहाली ऐसी थी कि एक-एक रुपया जोड़ना पड़ता था, लेकिन अजय की आंखों में एक अलग ही चमक थी।
  • इंजीनियरिंग के बाद UPSC में 452वीं और IFoS में 91वीं रैंक हासिल कर दोहरी सफलता पाई
  • अजय गुप्ता ने स्कॉलरशिप की मदद से पूरी की थी अपनी इंजीनियरिंग

पढ़ाई में शुरू से थे 'टॉपर'

गरीबी कभी अजय के सपनों के आड़े नहीं आई। उन्होंने अपनी मेहनत से सबको हैरान कर दिया। अजय ने 10वीं क्लास में 92.66% और 12वीं में 91.40% मार्क्स लाकर अपनी काबिलियत साबित कर दी। उनकी इसी मेहनत की वजह से उन्हें NIT रायपुर में एडमिशन मिला, जहां स्कॉलरशिप की मदद से उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग पूरी की।

एक नहीं, दो-दो बड़ी सफलताएं

29 साल के अजय ने इस साल इतिहास रच दिया है। उन्होंने इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFoS) की परीक्षा में पूरे देश में 91वीं रैंक हासिल की है। इतना ही नहीं, उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में भी 452वीं रैंक पाकर अपनी जीत का परचम लहराया है।

फॉरेस्ट सर्विस में जाएंगे अजय

अजय बताते हैं कि जब वो गांव में थे, तो उन्हें लगता था कि दुनिया बस वहीं तक है। लेकिन जब वो NIT पहुंचे, तब उन्हें एहसास हुआ कि वो भी बड़े सपने देख सकते हैं। बस्तर में रूरल डेवलपमेंट (ग्रामीण विकास) के काम के दौरान उनका इरादा और पक्का हो गया कि उन्हें फॉरेस्ट सर्विस में ही जाना है।

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