छत्तीसगढ़ के अजय गुप्ता ने गरीबी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की है। जंगलों में तेंदू पत्ता और महुआ चुनकर परिवार का साथ देने वाले अजय ने मेहनत के दम पर UPSC में 452वीं और IFS परीक्षा में 91वीं रैंक हासिल की। स्कॉलरशिप से इंजीनियरिंग पूरी करने वाले अजय की सफलता आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
छत्तीसगढ़ के जंगलों से निकली एक कहानी आज लोगों के दिल छू रही है। यह कहानी है रायगढ़ जिले के एक छोटे से गांव 'संबलपुरी' के रहने वाले अजय गुप्ता की। आज अजय ने वो मुकाम हासिल किया है जिसका सपना हर कोई देखता है, लेकिन वहां तक पहुंचने का रास्ता उनके लिए कांटों भरा था।
अजय का बचपन बाकी बच्चों जैसा नहीं था। जब दूसरे बच्चे खिलौनों से खेलते थे, तब अजय तपती धूप में अपने माता-पिता के साथ जंगलों में तेंदू पत्ता और महुआ चुनते थे। उनका पूरा परिवार इसी 'वनोपज' (Forest Produce) पर निर्भर था। तंगहाली ऐसी थी कि एक-एक रुपया जोड़ना पड़ता था, लेकिन अजय की आंखों में एक अलग ही चमक थी।
अजय का बचपन बाकी बच्चों जैसा नहीं था। जब दूसरे बच्चे खिलौनों से खेलते थे, तब अजय तपती धूप में अपने माता-पिता के साथ जंगलों में तेंदू पत्ता और महुआ चुनते थे। उनका पूरा परिवार इसी 'वनोपज' (Forest Produce) पर निर्भर था। तंगहाली ऐसी थी कि एक-एक रुपया जोड़ना पड़ता था, लेकिन अजय की आंखों में एक अलग ही चमक थी।
- इंजीनियरिंग के बाद UPSC में 452वीं और IFoS में 91वीं रैंक हासिल कर दोहरी सफलता पाई
- अजय गुप्ता ने स्कॉलरशिप की मदद से पूरी की थी अपनी इंजीनियरिंग