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किसानों को बरगलाकर मालामाल हुए कांग्रेस नेता! छत्‍तीसगढ़ भाजपा का कार्टून वार

छत्तीसगढ़ में होली के मौके पर भाजपा और कांग्रेस के बीच डिजिटल युद्ध छिड़ गया है. भाजपा ने कार्टून पोस्टर जारी कर भूपेश बघेल, दीपक बैज और चरण दास महंत पर सीधा हमला बोला. आरोप है कि कांग्रेस नेताओं ने धान किसानों को बरगलाकर खुद मालामाल हुए. कवर्धा के 7 करोड़ धान घोटाले पर कांग्रेस के फाग गीत का जवाब भाजपा ने गीत और कार्टून से दिया. यह सियासी जंग राज्य के किसानों को प्रभावित कर रही है.


रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजनीति में होली का रंग इस बार सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि आरोप-प्रत्यारोप और व्यंग्य का बना हुआ है. भाजपा ने सोशल मीडिया पर एक तीखा कार्टून पोस्टर जारी कर कांग्रेस के तीन प्रमुख नेताओं को सीधा निशाना बनाया है. इसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत को धान किसानों को बरगलाने और खुद मालामाल होने का आरोप लगाया गया है. यह हमला तब आया जब कांग्रेस ने कवर्धा के 7 करोड़ रुपये के कथित धान घोटाले को लेकर फाग गीत के जरिए सरकार पर तंज कसा था. भाजपा का कार्टून कांग्रेस के दोगले चरित्र को उजागर करने का प्रयास है, जहां एक तरफ वे विपक्ष में बैठकर भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं तो दूसरी तरफ अपने शासनकाल में हुए शराब और कोयला घोटालों को भूल जाते हैं.

वहीं, भाजपा और कांग्रेस के बीच डिजिटल युद्ध में राज्य के किसान इस सियासी जंग के बीच सवाल कर रहे हैं कि आखिर उनकी फसल और मेहनत का हश्र क्या होगा? इस कार्टून हमले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को नए सिरे से गर्मा दिया है क्योंकि यह सिर्फ व्यक्तिगत आरोप नहीं बल्कि पूरे कांग्रेस नेतृत्व की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है. भाजपा का दावा है कि कांग्रेस के ये नेता धान किसानों को चूहों के बहाने बरगलाकर खुद फायदे में रहे जबकि किसान भुखमरी और घाटे का सामना करते रहे. कवर्धा जिले के बाजार चारभांठा और बघर्रा केंद्रों में 26 हजार क्विंटल धान की कमी सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे घोटाला करार दिया. जिला विपणन अधिकारी को निलंबित किया गया लेकिन कांग्रेस इसे लीपापोती बता रही है. इसी बीच भाजपा ने फाग गीत और कार्टून के जरिए पलटवार किया जो छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को राजनीतिक हथियार बनाने का नया उदाहरण है. राज्य की ग्रामीण जनता इन गीतों और पोस्टर्स को सोशल मीडिया पर शेयर कर अपनी राय जता रही है.

कवर्धा धान घोटाले की पृष्ठभूमि

कवर्धा में धान खरीदी केंद्रों से 7 करोड़ रुपये मूल्य का धान गायब पाया गया. जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा ने इसे चूहों और दीमकों का काम बताया जिसे कांग्रेस ने भ्रष्टाचार का सबूत माना. मार्कफेड ने अधिकारी को निलंबित कर दिया लेकिन कांग्रेस इसे चुनावी स्टंट बता रही है. छत्तीसगढ़ धान उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है इसलिए यह मुद्दा किसानों की भावनाओं से सीधा जुड़ा है.

कांग्रेस का फाग तंज और ‘मुसवा’ गीत

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा में फाग की धुन पर गीत गाया- “दे दे बुलउवा मुसवा को सांय-सांय, मुसवा बिन घोटाला नई होय… 7 करोड़ का धान घोटाला, दे दे बुलउवा विष्णु जी सांय-सांय”. प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला और अन्य नेताओं ने भी इसे वायरल किया. गीत सीधे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पर तंज था और कांग्रेस ने इसे होली का सांस्कृतिक व्यंग्य बताया.

भाजपा का जवाबी हमला: कार्टून और गीत

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने जवाबी फाग गाया- “पकड़ागे धरागे मुसवा मन रे… शराब घोटाला करइया, कोयला घोटाला करइया, कौनों जेल में हे भइया”. भाजपा विधायक अनुज शर्मा ने भी “जरगे कांग्रेसिया मन के जान रे… विष्णु देव सरकार ले” गीत जारी किया. सबसे तीखा हमला कार्टून पोस्टर के रूप में हुआ जिसमें कांग्रेस नेताओं पर दोगलापन का आरोप लगाया गया.

डिजिटल युद्ध का व्यापक प्रभाव

सोशल मीडिया पर वीडियो, कार्टून और चित्रों का आदान-प्रदान तेज हो गया है. राहुल गांधी और पूर्व अधिकारी सौम्या चौरसिया का भी जिक्र हुआ. यह युद्ध सिर्फ नेताओं तक सीमित नहीं बल्कि ग्रामीण मतदाताओं तक पहुंच रहा है. छत्तीसगढ़ में लोक गीत हमेशा से चुनावी हथियार रहे हैं- 2018 और 2023 के चुनावों में भी फाग और पंथी गीतों ने भूमिका निभाई थी.

राजनीतिक विश्लेषण: किसान और 2027 चुनाव

छत्तीसगढ़ किसान राज्य है. कांग्रेस के शासन में कथित घोटालों (शराब घोटाला 2000 करोड़ से ज्यादा का आरोप) और अब भाजपा शासन में धान घोटाले का मुद्दा किसानों का विश्वास तोड़ रहा है. भाजपा का कार्टून हमला कांग्रेस की आंतरिक कलह और पुरानी छवि को फिर उजागर करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे व्यंग्य 2027 विधानसभा चुनाव में ग्रामीण वोट बैंक को प्रभावित करेंगे. दोनों दल किसानों को लुभाने के लिए फंड और योजनाएं बढ़ा रहे हैं लेकिन सड़क पर सवाल वही है- “मुसवा कौन है?”


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