जशपुर । डेस्क: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में नशीले पदार्थों के खिलाफ जारी अभियान के बीच पुलिस महकमे के भीतर ही एक बड़े भ्रष्टाचार और अपराध का पर्दाफाश हुआ है. कोतवाली पुलिस ने एक संगठित नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए न केवल भारी मात्रा में गांजा बरामद किया, बल्कि इस अवैध धंधे में मददगार बने दो आरक्षकों को भी सलाखों के पीछे भेज दिया है.
यह कार्रवाई उस समय शुरू हुई जब 28 फरवरी को मुखबिर की सटीक सूचना पर पुलिस ने विवेकानंद कॉलोनी स्थित एक किराए के मकान में दबिश दी. वहां से रवि विश्वकर्मा नामक व्यक्ति के पास से 24 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ. हिरासत में लिए जाने के बाद रवि ने खुलासा किया कि यह खेप उसे गोविंद उर्फ सुनील भगत ने सुरक्षित रखने के लिए दी थी.
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपी गोविंद को भी दबोच लिया.
मामले की संवेदनशीलता तब बढ़ गई जब जांच के दौरान इसमें पुलिसिया मिलीभगत के प्रमाण मिले. कड़ी पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि तपकरा थाने में पदस्थ आरक्षक धीरेंद्र मधुकर और अमित त्रिपाठी इस तस्करी नेटवर्क को संरक्षण दे रहे थे और इसमें सक्रिय रूप से शामिल थे.
एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देश पर दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है. तपकरा क्षेत्र ओडिशा सीमा से सटे होने के कारण तस्करों के लिए एक सुरक्षित गलियारे के रूप में इस्तेमाल हो रहा था, जहां से नशीले पदार्थों की खेप उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में खपाई जाती थी.
जशपुर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे 'ऑपरेशन आघात' के तहत यह एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पुलिस ने पिछले दो महीनों में 344 किलो गांजा जब्त कर 13 तस्करों को जेल भेजा है.
एएसपी राकेश पटनावार ने स्पष्ट किया है कि वर्दी की आड़ में अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और विभागीय अनुशासन सर्वोपरि है. फिलहाल पुलिस इस अंतरराज्यीय रैकेट की जड़ों तक पहुँचने के लिए जांच का दायरा बढ़ा रही है ताकि सीमा पार से होने वाली इस तस्करी पर पूर्ण विराम लगाया जा सके.