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जिला अस्पताल में जांच के किट नहीं, एडवाइजरी जारी कर अपना पल्ला झाड़ रहे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी

 जिले में स्वाईन लू के दो केस मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा अलर्ट तो जारी किया जा रहा है, लेकिन इसकी जांच व उपचार को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। हालात यह है कि मेकाहारा में विशेषज्ञ नहीं हैं तो जिला अस्पताल में स्वाइन लू की जांच करने कीट ही नहीं है।


प्रदेश के सभी जिलों में स्वाईन लू को लेकर काफी गंभरता बरती जा रही है, लेकिन रायगढ़ जिला में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिर्फ एडवाइजरी जारी कर बीमारी को दरकिनार कर रहा है। मौसम में बदलाव के साथ जिला अस्पताल हो या मेडिकल कालेज अस्पताल सभी जगह बुखार, खांसी, गले में खरास व बदन दर्द से पीड़ित तो मरीज सुबह से पहुंच रहे हैं।


इन मरीजों को सही जांच व उपचार की सुविधा नहीं मिल रही है। बगैर जांच के ही डाक्टरों द्वारा नार्मल दवाई देकर चलता किया जा रहा है। अभी तक जिले में दो स्वाइन लू के मरीज मिले हैं। इन दोनों मरीजों की पुष्टि रायपुर में हुई है। एक मरीज की मौत हो चुकी है तो दूसरे का रायपुर एमएमआई में उपचार चल रहा है।


जिला अस्पताल में पदस्थ टीवी रोग विशेषज्ञ डॉ. जया किशोरी चौधरी ने बताया हर दिन 8 से 10 मरीज श्वांस से संबंधित अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन कीट नहीं होने के कारण इन मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है। ऐसे में उक्त मरीजों को स्वाईन लू है या नहीं इसकी पुष्टि नहीं हो पा रही है। मरीजों को नार्मल दवा ही दिया जा रहा है। अभी तक कोई गंभीर मरीज नहीं आया है, अगर गंभीर मरीज आता है तो उसको भर्ती कर उपचार किया जाएगा।


मेकाहारा में विशेषज्ञ नहीं

इधर मेडिकल कालेज अस्पताल में श्वांस व चेस्ट संबंधित कोई विशेषज्ञ ही नहीं हैं। ऐसे में अगर कोई मरीज आता है तो एमडी मेडिसिन द्वारा उसे दवाई देकर भेज दिया जाता है। इस संबंध में जब (CG Health Alert) अस्पताल के अधिकारियों से बात की गई तो उनका कहना था कि श्वांस संबंधि विशेषज्ञ नहीं होने के कारण दिक्कत होती है। यदि किसी मरीज में स्वाइन लू का लक्ष्ण दिखता है तो उसे जिला अस्पताल भेजा जाता है। ऐसे में अब जिले के मरीज मेडिकल कालेज अस्पताल व जिला अस्पताल के बीच चक्कर काटते नजर आ रहे हैं।

स्वाइन लू के लक्षण

 विशेषज्ञ चिकित्सकों की माने तो बुखार, खांसी, गले में खरास, शरीर में दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना, थकान यह स्वाइन लू के लक्षण हैं। कभी-कभी उल्टी-दस्त की शिकायत भी हो सकती है। यह एक संक्रमण है जो एक वायरस के कारण होता है। यह एक दूसरे में आसानी से फैलता है। यदि किसी व्यक्ति को इस तरह की शिकायत हो तो उससे दूरी बनाकर रखना चाहिए।

बरतें सावधानियां

अगर किसी व्यक्ति को स्वाइन लू का लक्षण हो तो खांसते, छींकते समय नाक व मुंह को टिशू/कपड़े से ढ़के। हाथों को अक्सर साबुन और पानी से धोएं अथवा सेनेटायजर का प्रयोग करतें रहें। भीड़-भाड़ वाली जगहों पर अनावश्यक जाने से बचें। लक्षण नजर आते ही तुरंत नजदीकी अस्पताल में जाकर जांच व उपचार कराएं।

जांच के नाम पर खानापूर्ति

अधिकारियों की माने तो जिला अस्पताल में जांच के लिए कमरे तैयार कर दिया गया है। साथ ही मरीजों के लिए बेड भी तैयार किया गया है, लेकिन अभी तक यहां कीट उपलब्ध नहीं हो पाया है। (CG Health Alert) बताया जा रहा है कि कीट में पाजिटिव पाए जाने पर उसे आरटीपीसीआर के लिए मेडिकल कालेज भेजा जाएगा, लेकिन प्राथमिक जांच की व्यवस्था नहीं होने के कारण जांच नहीं हो पा रहा है।


स्वाइन लू को लेकर लगातार एडवाइजरीसी

एमएचओ डॉ. बीके चंद्रवंशी द्वारा स्वाइन लू को लेकर लगातार एडवाइजरी जारी की गई है, लेकिन उनको यह भी पता नहीं है कि इसकी जांच व उपचार के लिए अस्पताल में क्या व्यवस्था है। इस संबंध में जब इनसे बात करने का प्रयास किया गया तो सुबह से लेकर देर शाम तक बैठक का हवाला देते रहे। ऐसे में पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंचने के बाद लगातार परेशान हो रहे हैं। साथ ही उनके परिजनों को भी इस गंभीर बीमारी को लेकर भय सताने लगा है।

केजीएच सिविल सर्जन डॉ. उषा किरण ने बताया कि भगत जिला अस्पताल में स्वाइन लू जांच के लिए अलग से कमरा तैयार करने के साथ बेड भी तैयार कर लिया गया है। (CG Health Alert) जहां तक बात कीट की है तो मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। मैं पता कर कीट उपलब्ध कराने की व्यवस्था करती हूं।

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