अब तक डेंगू 24 मरीज चिन्हांकित हैं। एक को अस्पताल में भर्ती किया गया है। छह सक्रिय मरीज होम आइसोलेट हैं। वहीं 17 के स्वस्थ्य होने का दावा किया जा रहा है। स्वाइन फ्लू से बीते सप्ताह पड़ोसी जिला जांजगीर-चांपा व कोरिया में एक-एक मरीजों की मौत हो चुकी है। डेंगू मलेरिया के बाद स्वाइन फ्लू के बढ़ते असर ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
जिला मेडिकल कालेज के आइसीयू में भर्ती एक मरीज की मौत हो गई। स्वजनों ने डेंगू से ग्रसित होने की बात कहते हुए चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगा हंगामा किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने समझाइश देकर शांत कराया। उधर अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के डेंगू निगेटिव निकलने की बात कही है।
ग्राम पोड़ीखुर्द निवासी दीपक कुर्रे 35 वर्ष का इलाज गांव के ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा था। हालत गंभीर होने पर मरीज को 17 अगस्त को जिला मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया। स्वजनों का कहना है कि गुरुवार की सुबह जब मरीज जीवित था तो डाक्टर ने कहा कि डेंगू के मरीज बचते नहीं। साथ ही मरीज को कई अन्य समस्याएं भी हैं। यह सुन कर स्वजन भड़क गए और आइसीयू में हंगामा मचा दिया। अस्पताल प्रबंधन ने इस घटना की अस्पताल पुलिस चौकी को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह समझाइश देकर मामला शांत कराया। मृतक की पत्नी ने आरोप लगाया कि अस्पताल में भर्ती किए जाने के दौरान वह ठीक था और खाना भी खा रहा था। इलाज में लापरवाही की वजह से उसकी हालत और गंभीर हुई। इस मामले में जिला मेडिकल कालेज अस्पताल के सहायक अधीक्षक डा रविकांत जाटवर ने कहना है कि मरीज को अस्पताल लाया गया, उस वक्त उसकी हालत बेहद खराब थी। लंग्स में इंफेक्शन काफी बढ़ चुका था। किसी निजी अस्पताल में उसका उपचार चल रहा था। हालत बिगड़ने पर रेफर कर दिया गया। रक्त परीक्षण से डेंगू निगेटिव मिला। डेंगू की वजह से नहीं उसकी कई और बीमारी की वजह से मौत हुई है।
अब तक मलेरिया के मिल चुके हैं 502 मरीज
जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जनवरी से ही लोगों का रैपिट टैस्ट कर रही है। अब तक मलेरिया के 502 मरीज मिल चुके हैं। इनमें 50 से भी अधिक सक्रिय मरीज अस्पताल व घरों में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता कार्यक्रम के दावे के बावजूद भी मरीजों की संख्या में बीते वर्ष की तुलना में वृद्धि हुई है। वर्षा के कारण मौसमी बीमारी असर थमने का नाम नहीं ले रहा। जिला मेडिकल कालेज अस्पताल में प्रतिदिन बुखार व डायरिया के औसतन 50 मरीज पहुंच रहे हैं। स्वच्छ पेयजल का अभाव ग्रामीण व शहर श्रमिक बस्ती के लोगाें में असर अधिक देखने को मिल रहा है।
