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छत्तीसगढ़ में BJP की सरकार, फिर भी होंगे EVM नहीं, बेलेट पेपर से चुनाव,जानिए वजह

 EVM Vs Ballot Paper: छत्तीसगढ़ के आगामी नगरीय निकाय चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बजाय मतपत्रों का उपयोग करके कराए जाएंगे। कांग्रेस सरकार को नवंबर-दिसंबर में होने वाले चुनावों के लिए इस पारंपरिक पद्धति पर वापस लौटना पड़ रहा है। यह परिवर्तन राज्य के मौजूदा नियमों के अनुसार किया गया है, जिन्हें इन चुनावों के लिए ईवीएम के उपयोग की अनुमति देने के लिए बदलाव नहीं किया गया 


ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ में शहरी निकायों में परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, 70 निकायों के लिए अधिसूचनाएँ पहले ही जारी की जा चुकी हैं। राज्य में 184 शहरी निकाय हैं, जिनमें 14 नगर निगम, 48 नगर परिषद और 122 नगर पंचायतें शामिल हैं। इनमें से 169 निकायों में चुनाव होंगे, जबकि शेष 2025 में अपना कार्यकाल पूरा करेंगे।

डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के दौरान नगर निगम चुनाव ईवीएम के माध्यम से कराए जाते थे। हालांकि, भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने नगरीय निकाय अधिनियम में संशोधन करके बैलेट पेपर से चुनाव कराने की व्यवस्था वापस कर दी थी। मौजूदा भाजपा सरकार ने भी फ़िलहाल नगर निगम अधिनियम 1956 और छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 में बदलाव नहीं किया है।

इसी प्रकार भूपेश बघेल की सरकार ने महापौर के लिए प्रत्यक्ष मतदान की व्यवस्था समाप्त कर दी थी, जो पहले प्रत्यक्ष मतदाताओं द्वारा किया जाता था। भाजपा मानती है कि इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए भी संशोधन आवश्यक हैं। यह जानने योग्य तथ्य है कि 1999 में अविभाजित मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने महापौर के चुनाव का अधिकार पार्षदों से लेकर जनता को सौंप दिया था। 2000 से 2003 तक तरुण चटर्जी रायपुर के पहले प्रत्यक्ष निर्वाचित महापौर बने, उसके बाद 2004 में भाजपा के सुनील सोनी महापौर बने थे।

दरअसल कांग्रेस पार्टी देशभर में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की वकालत करती है और आगामी नगरीय निकाय चुनावों के लिए तैयार है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा, "कांग्रेस का मानना ​​है कि देशभर में बैलेट पेपर से चुनाव होने चाहिए। इधर छत्तीसगढ़ के भाजपा महासचिव संजय श्रीवास्तव का कहना है कि हम किसी भी माध्यम सभी चुनावों के लिए तैयार हैं।

कलेक्टरों ने राज्य भर में छह नगर निगमों सहित कुल 75 निकायों में परिसीमन की आवश्यकता की पहचान की है। हालांकि, अदालत के आदेशों ने पांच निकायों राजनांदगांव, कुम्हारी, बेमेतरा, कवर्धा और तखतपुर में परिसीमन पर रोक लगा दी है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 14 नगर निगमों में से 13 में कांग्रेस के पास महापौर पद हैं।

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