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छत्तीसगढ़ में यहां मिला 300 साल पुराना खजाना! जंगलों में छिपी दुर्लभ पांडुलिपियां…..

 

महासमुंद। महासमुंद जिले मे जहाँ हजारों वर्ष पुरानी वैभव शाली सभ्यता के प्रमाण पुरातात्विक स्थल सिरपुर मे मिलते हैं, वहीं अब दुर्लभ पांडुलिपियों के सर्वेक्षण मे महासमुंद जिले को छत्तीसगढ़ मे सर्वाधिक पांडुलिपि वाला जिला घोषित किया गया है। Gyan Bharatam App वर्तमान मे जिले मे 300 वर्ष से भी अधिक पुरानी पांडुलिपियों की खोज की जा चुकी है ।विशेष रूप से दूरस्थ जंगलों के बीच बसे अंचल मे जनजातीय समुदायों के पास दुर्लभ पांडुलिपियाँ सहेज कर रखी गई हैं।

यह पांडुलिपियाँ अधिकतर ताड़पत्र पर लिखी गई हैं। जिनमे उड़िया लिपि का प्रयोग हुआ है। सैंकड़ों वर्ष पुराने इन पांडुलिपियों मे भागवत पुराण, लक्ष्मी पुराण, दुर्गा ग्रंथ , ज्योतिष ज्ञान , जनजातीय धार्मिक संस्कार पद्धति, जादू-टोना, भूत पिशाच निवारण, जड़ी-बूटी औषधि, पशु चिकित्सा , बाण विद्या एवं इतिहास से संबंधित विषय शामिल हैं।

इन जगहों पर मिली पांडुलिपियों

गौरतलब है कि बागबाहरा ब्लाक के दूरस्थ एवं घोर जंगल के बीच बसे गांवों मे दुर्लभ पांडुलिपियों की खोज हुई है। जनजातीय आदिवासी परिवारों के पास सैंकड़ों सालों से सुरक्षित पांडुलिपियों का आज भी धार्मिक , सामाजिक , चिकित्सा एवं तंत्र मंत्र मे उपयोग हो रहा है।

क्या होती है पांडुलिपि?

पांडुलिपि वह हस्तलिखित सामग्री होती है , जो सामान्यतः 75 वर्ष से अधिक पुरानी हो । यह पांडुलिपियाँ ताड़पत्र, भोजपत्र, ताम्रपत्र, चमड़े, कपड़े या अन्य पारंपरिक माध्यमों पर लिखी गई हो सकती हैं । इसमे प्राचीन कहानी, इतिहास, धार्मिक ग्रंथ, अनुष्ठान विधि, लोकज्ञान एवं औषधीय ज्ञान आदि विषय समाहित होते हैं।


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