बारिश होते ही पानी सड़क पर जमा हो जाता है और कुछ ही समय में पूरी गली कीचड़ से भर जाती है। इससे ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के समय ही यदि जल निकासी की व्यवस्था कर दी जाती तो आज यह स्थिति नहीं बनती।
सड़क बनी, लेकिन जल निकासी का इंतजाम नहीं
ग्रामीणों के मुताबिक पतरापाली की इस गली में सड़क निर्माण हुए कई साल बीत चुके हैं। इसके बावजूद सड़क के दोनों ओर नाली नहीं होने के कारण बारिश का पानी निकल नहीं पाता। पानी लंबे समय तक सड़क पर जमा रहता है, जिससे कीचड़ की स्थिति बन जाती है।
लगातार जलभराव के कारण सड़क की गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई तो सड़क भी जल्द खराब हो सकती है और भविष्य में दोबारा मरम्मत या निर्माण पर सरकारी राशि खर्च करनी पड़ सकती है।
बच्चों और बुजुर्गों की बढ़ी परेशानी
बारिश के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए इसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। कीचड़ के कारण कपड़े खराब होने के साथ ही फिसलकर गिरने का खतरा भी बना रहता है।
वहीं बुजुर्गों और पैदल चलने वाले लोगों के लिए भी जलभराव वाली सड़क परेशानी का कारण बनी हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक लंबे समय तक पानी जमा रहने से गंदगी और मच्छरों की समस्या भी बढ़ सकती है।
चार-पांच साल में भी नाली नहीं बनी, उठ रहे सवाल
ग्रामीण अब पंचायत के विकास कार्यों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जब सड़क निर्माण की योजना बनाई गई थी, तब जल निकासी की जरूरत को ध्यान में क्यों नहीं रखा गया?
ग्रामीणों के सवाल हैं कि—
सड़क निर्माण के समय नाली का निर्माण क्यों नहीं कराया गया?
क्या नाली निर्माण के लिए पंचायत के पास राशि उपलब्ध नहीं है?
यदि राशि उपलब्ध है तो उसका उपयोग किस कार्य में किया जा रहा है?
क्या सड़क निर्माण के बाद संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया?
पिछले चार-पांच वर्षों में इस क्षेत्र में सड़क और नाली के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई?
स्वीकृत राशि में से कितना भुगतान किया गया?
क्या इन विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन किया गया?
विकास के दावों पर जमीनी तस्वीर खड़े कर रही सवाल
सरकार और पंचायत स्तर पर गांवों में मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत कार्य कराए जाते हैं। लेकिन पतरापाली की इस गली की स्थिति यह सवाल जरूर खड़ा करती है कि सड़क निर्माण के साथ जल निकासी की व्यवस्था को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई।
ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ सड़क बना देना पर्याप्त नहीं है। बारिश के दौरान पानी की निकासी की व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। यदि सड़क पर ही पानी और कीचड़ जमा हो जाए तो निर्माण की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
विकास कार्यों की जांच की मांग
ग्रामीणों ने पिछले चार-पांच वर्षों में पतरापाली में कराए गए सड़क, नाली और अन्य विकास कार्यों की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित विभाग को गांव में हुए कार्यों की स्वीकृत राशि, कार्यादेश, भुगतान और मौके पर कार्य की वास्तविक स्थिति की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी कार्य के लिए राशि स्वीकृत हुई है तो उसकी जानकारी पंचायत स्तर पर सार्वजनिक होनी चाहिए, ताकि ग्रामीणों को भी पता चल सके कि उनके गांव के विकास के लिए कितनी राशि आई और उसका इस्तेमाल किस काम में किया गया।
अब पंचायत और विभाग के जवाब का इंतजार
पतरापाली के ग्रामीणों ने पंचायत के जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के अधिकारियों से मौके का निरीक्षण कर समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि गली में जल निकासी के लिए नाली का निर्माण कराया जाए, ताकि बारिश के दौरान सड़क पर पानी जमा न हो।
हालांकि, इस मामले में ग्राम पंचायत और संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। पंचायत या विभाग की ओर से यदि इस संबंध में कोई स्पष्टीकरण, प्रस्ताव, स्वीकृति या अन्य जानकारी सामने आती है तो उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।
अब देखना होगा कि ग्रामीणों की इस समस्या पर पंचायत और संबंधित विभाग कब तक कार्रवाई करते हैं और पतरापाली की इस गली को जलभराव और कीचड़ की समस्या से कब तक राहत मिलती है।
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