Khabar Chhattisgarh

कोरबा में डेढ़ करोड़ का अनोखा ऑडिटोरियम, एक दशक से चल रहा निर्माण

पूर्व सीएम के हाथों हुआ था इस भवन का उदघाटन. अबतक 3 बार भवन की सीलिंग गिर चुकी है.

कोरबा:
जिले के सबसे बड़े कॉलेज शाईवीपीजी लीड कॉलेज में 10 साल से एक अनोखा ऑडिटोरियम निर्माणाधीन है. 2016-17 में जब निर्माण शुरू हुआ, तब से अब तक यह अधूरा है. जिसकी वजह से इसे कॉलेज प्रबंधन ने नगर पालक निगम से हैंडोवर नहीं लिया है. पहली बार इस ऑडिटोरियम की परिकल्पना 2014-15 में की गई थी. तब स्व. डॉ बंशीलाल महतो कोरबा से भाजपा के सांसद हुआ करते थे. उस समय इसका प्रस्ताव जिला खनिज न्यास संस्थान को भेजा गया था. इसके कुछ दिनों बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ.

डेढ़ करोड़ का अनोखा ऑडिटोरियम: अबतक इस ऑडिटोरियम की सीलिंग तीन बार गिर चुकी है. पहली बार स्टेज की तरफ का एक हिस्सा, तो दूसरी बार में अन्य जगह का हिस्सा और तीसरी बार में शत प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से ज़मीदोज हो चुका है. इतना ही नहीं ऑडिटोरियम का निर्माण जब शुरू हुआ, तब इसमें विद्युतीकरण का भी कोई बजट नहीं था. बाद में इसे स्वीकृत कराया गया.

जिला खनिज न्यास संस्थान(डीएमएफ):डीएमएफ के कार्यों में भ्र्ष्टाचार के कारण जिले की तत्कालीन कलेक्टर आईएएस रानू साहू को जेल जाना पर पड़ा था. ईडी की चार्जशीट में यह बात उल्लेखित थी कि डीएमएफ के किसी भी कार्य को स्वीकृति देने के पहले संबंधित ठेकेदार से इसकी 40 फ़ीसदी राशि को कमीशन के तौर पर प्राप्त किया जाता था. इसके बाद ही कार्य को स्वीकृति देकर उसके लिए फंड आवंटित किया जाता था.

यह दूसरा ऑडिटोरियम जिसमें बरती गई लापरवाही: एक दिन पहले रिसदी रोड स्थित लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ऑडिटोरियम का सीलिंग गिरने के एवज में हाउसिंग बोर्ड के दो अभियंताओं को निलंबित कर दिया है. कॉलेज के ऑडिटोरियम की सीलिंग एक नहीं तीन बार गिर चुकी है. जो निर्माण कार्य लगभग 2016 में शुरू हुआ था.वह 2025 में भी अधूरा है. इसकी निर्माण एजेंसी नगर पालिक निगम कोरबा है. इसे कॉलेज प्रबंधन को हैंडोवर नहीं किया गया है. निर्माण अधूरा रहने के कारण कॉलेज प्रबंधन ने ही इसे हैंड ओवर लेने से इनकार किया था. जर्जर और बदहाल अवस्था में ऑडिटोरियम आज भी वैसे ही कॉलेज परिसर में मौजूद है. लेकिन न तो इस लापरवाही के लिए किसी की जवाबदेही तय की जा रही, न ही इसकी उपयोगिता साबित करने के लिए इसके बचे हुए निर्माण कार्य को ही पूर्ण किया जा रहा.

लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ऑडिटोरियम:लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ऑडिटोरियम का उद्घाटन सीएम विष्णु देव साय ने यहां पहुंचकर किया था. जबकि पीजी कॉलेज के ऑडिटोरियम का उद्घाटन भी अपने अंतिम कार्यकाल के अंतिम दिनों में तत्कालीन सीएम डॉ रमन सिंह ने किया था. तब ओपन थिएटर घंटाघर में एक सार्वजनिक सभा का आयोजन किया गया था. इसी सभा में अनेक कार्यों के लोकार्पण एवं शिलान्यास के कार्यक्रम में तत्कालीन सीएम ने इस ऑडिटोरियम का उद्घाटन भी कर दिया था. हालांकि तब भी यह ऑडिटोरियम निर्माणाधीन था. इसका निर्माण पूर्ण नहीं किया गया था. अधूरा रहने के दौरान ही इस ऑडिटोरियम का उद्घाटन वाहवाही लूटने के लिए प्रशासन ने करवा लिया था. लेकिन इसके निर्माण कार्य को आज तक पूरा नहीं किया जा सका.

शासकीय पीजी कॉलेज: 400 सीटों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम निर्माण के लिए जिला प्रशासन ने खनिज न्यास मद से 1 करोड़ 49 लाख की मंजूरी दी थी. निर्माण पूर्ण होने पर पीजी कॉलेज के इस ऑडिटोरियम में मंच पर एक साथ 50 कलाकारों की प्रस्तुति का आनंद 400 लोग उठा सकेंगे.

10 सालों से हो रहा इंतजार : छात्र नेता राकेश पंकज का कहना है कि इसके पहले जब आरके सक्सेना इस कॉलेज का प्रिंसिपल थे. तब यह ऑडिटोरियम बनना शुरू हुआ था, इसके बाद से लेकर अब तक हमने कई बार कॉलेज प्रबंधन से पूछा कि इसका निर्माण कब पूरा होगा. लेकिन इसका जवाब नहीं मिलता. डेढ़ करोड़ के लागत का निर्माण किया गया है. लेकिन इससे भी ज्यादा पैसा इसमें लगाए गए होंगे. हर 3 साल में मरम्मत किया जाता है, पता नहीं किसने पैसे इसमें खर्च कर दिए गए, लेकिन यह किसी भी स्टूडेंट के काम नहीं आ पा रहा है.

कॉलेज प्रबंधन या निर्माण एजेंसी आज भी यह नहीं बता पा रहे हैं कि इसका हैंडोवर कॉलेज प्रबंधन को कब होगा, निर्माण डीएमएफ फंड से किया गया था और इस फंड से जिन कार्यों का निर्माण होता है. सब जानते हैं कि उसकी क्या स्थिति रहती है. कलेक्टर रानू साहू को डीएमएफ फंड में गड़बड़ी करने के कारण ही जेल जाना पड़ा था:राकेश पंकज, छात्र नेता

कॉलेज को नहीं किया गयाै हैंडओवर: पीजी कॉलेज में प्रोफेसर डॉ एस के गोभिल कहते हैं कि इस ऑडिटोरियम का निर्माण 2017 में शुरू हुआ था. इसके बाद निर्माण कार्य जारी है. काफी पहले फॉल सीलिंग गिरी थी. जिसके बाद इसकी फिर से मरम्मत की गई थी, कुछ निर्माण कार्य शेष है, जिसके कारण फिलहाल इसे कॉलेज को हैंडओवर नहीं किया गया है. मुझे अब तक जो जानकारी है, वह यही है कि काम शेष होने के कारण कॉलेज ने इसे अधिग्रहित नहीं किया है.

कल्चरल एक्टिविटीज कराने में दिक्कत: प्रोफेसर डॉ एस के गोभिल कहते हैं कि यदि ऑडिटोरियम कॉलेज को हैंडओवर कर दिया जाता है, तो कल्चरल एक्टिविटीज को बढ़ावा मिलता. हमारे कॉलेज में छात्र संख्या काफी अधिक है, कई कार्यक्रम करने में हमें परेशानी आती है. यदि इतना बड़ा ऑडिटोरियम हमें मिल जाएगा तो, निश्चित तौर पर कार्यक्रम करने में आसानी होगी. जिसका लाभ छात्रों को मिलेगा.

Post a Comment

Previous Post Next Post
 Khabar Chhattisgarh
 Khabar Chhattisgarh
 Khabar Chhattisgarh