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खतरे में छत्तीसगढ़ का खजुराहो: भोरमदेव मंदिर की दीवारों से रिस रहा बारिश का पानी, डिप्टी सीएम ने की बैठक

 कबीरधाम जिला स्थित भोरमदेव मंदिर के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। क्योंकि, मंदिर की दीवारों से बारिश का पानी रिस रहा है। ऐसे में डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने रायपुर स्थित निवास कार्यालय में संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक ली।


छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहे जाने वाले कबीरधाम जिला स्थित भोरमदेव मंदिर के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। क्योंकि, मंदिर की दीवारों से बारिश का पानी रिस रहा है। ऐसे में आज बुधवार को क्षेत्रीय विधायक और डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने अपने रायपुर स्थित निवास कार्यालय में संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, कबीरधाम जिले से आए गणमान्य नागरिकों व पुजारी के साथ भोरमदेव मंदिर के जीर्णोद्धार तथा परिसर के रख-रखाव के संबंध में बैठक ली। 


बैठक में डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि बरसात के दिनों में पानी रिसाव की समस्या को तत्काल दूर करे। उन्होंने संस्कृति विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि मंदिर के इतिहास से संबंधित वीडियो डॉक्यूमेंटेशन बनाए ताकि श्रद्धालु मंदिर के इतिहास से परिचित हो सके। थ्री डी डिजाइन और लिडार सर्वे करवाने के निर्देश भी दिए। साथ ही भोरमदेव महोत्सव से पहले वर्तमान में चल रहे निर्माण कार्य और ट्रीटमेंट को पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं को बढ़ाने और मंदिर परिसर के विकास के विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा की गई। बैठक में संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संचालक विवेक आचार्य, सहायक अभियंता चेतन मनहरे, उपअभियंता दिलीप साहू, कबीरधाम क्षेत्र के आदित्य श्रीवास, अजय चंद्रवंशी, आशीष पाठक, दुर्गेश दुबे व खोरु सिंह उपस्थित थे। 

 

विभिन्न कार्य को लेकर हुई चर्चा 


बैठक में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं को बढ़ाने और मंदिर परिसर के विकास के विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा की गई। श्रद्धालुओं के लिए शेड का निर्माण, चौकीदार क्वाटर को मंदिर के पास से अन्यत्र शिफ्ट करने, मंदिर के पीछे वीआईपी रूम बनाने चर्चा की गई। इसके अलावा मंदिर के पीछे और वीआईपी रूम के बीच की दीवाल को हटाकर ग्रील और गेट लगाने, भैरव मंदिर, चामुंडा माता मंदिर और हनुमान मंदिर आदि के पारंपरिक स्वरूप बरकरार रखने के निर्देश दिए। मंदिर के बाहरी हिस्से के सौंदर्यीकरण के लिए पर्यटन विभाग अंतर्गत प्रसाद योजना के तहत प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। इसके अंतर्गत रोड का चौड़ीकरण, मेन गेट के बाहर पार्किंग की व्यवस्था, ई-रिक्शा का संचालन, तालाब का सौंदर्यीकरण, बाउंड्रीवाल के चारों ओर शिव कथाओं से संबंधित भित्ति चित्र बनवाने का प्रस्ताव भेजा जाएगा। बैठक में भोरमदेव मंदिर से छेड़की महल-मड़वा महल तक पक्की सड़क के निर्माण करवाने, मंदिर परिसर में सोलर लाइट्स और सीसीटीवी कैमरे लगाने, साथ ही मंदिर परिसर के ड्रेनेज सिस्टम में सुधार और फ्लोरिंग की जगह सेंड स्टोन लगाने के लिए चर्चा की गई। क्योंकि यह क्षेत्र पुरातत्व विभाग अंतर्गत आता है, इसलिए सभी कार्य पुरातत्व विभाग की अनुमति से किए जाएंगे।


जानिए भोरमदेव मंदिर का इतिहास

भोरमदेव छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में कवर्धा से 18 किमी दूर व रायपुर से 125 किमी दूर चौरागांव में एक हजार वर्ष पुराना मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर कृत्रिमतापूर्वक पर्वत शृंखला के बीच स्थित है, यह लगभग 7 से 11 वीं शताब्दी तक की अवधि में बनाया गया था। यहां मंदिर में खजुराहो मंदिर की झलक दिखाई देती है, इसलिए इस मंदिर को “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” भी कहा जाता है। मंदिर का मुख पूर्व की ओर है। मंदिर नागर शैली का एक सुंदर उदाहरण है। मंदिर में तीन ओर से प्रवेश किया जा सकता है। मंदिर एक पांच फुट ऊंचे चबुतरे पर बनाया गया है। तीनों प्रवेश द्वारों से सीधे मंदिर के मंडप में प्रवेश किया जा सकता है। मंडप की लंबाई 60 फुट है और चौड़ाई 40 फुट है। मंडप के बीच में 4 खंबे हैं तथा किनारे की ओर 12 खंबे हैं, जिन्होंने मंडप की छत को संभाल रखा है। सभी खंबे बहुत ही सुंदर व कलात्मक हैं। इस मंदिर में पूरे सावन माह में लाखों की संख्या में शिव भक्त आते हैं।

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