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छत्तीसगढ़ में कैसे होगा शिक्षा का विकास ? जब बिना टीचर के चलेंगे स्कूल

छत्तीसगढ़ के MCB जिले में शिक्षा का स्तर बदहाल है. आलम ऐसा है कि बरबसपुर संकुल के लोहारी और डोंगरीपारा प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, जिससे बच्चों की शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हो रही है.

छत्तीसगढ़ के MCB जिले में शिक्षा का स्तर बदहाल है. आलम ऐसा है कि बरबसपुर संकुल के लोहारी और डोंगरीपारा प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, जिससे बच्चों की शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हो रही है. लोहारी में स्थित प्राइमरी स्कूल में केवल एक ही टीचर हैं. ऐसे हालत इसलिए हो रहे हैं क्योंकि बीते सत्र में टीचरों के काफी प्रमोशन और सस्पेंशन हुए हैं. ऐसे में लोहारी गांव के इस प्राइमरी स्कूल में पहली कक्षा में 10, दूसरी में 19, तीसरी में 21, चौथी में 22 और पांचवीं में 29 बच्चे पड़ते हैं. कुल मिलाकर इस सत्र में बच्चों की संख्या 101 है. प्राइमरी स्कूल में पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं के लिए सिर्फ एक टीचर की व्यवस्था है, जिसके चलते टीचर के छुट्टी पर जाने पर बच्चों को मिड डे मील और खेलकूद कर घर लौटना पड़ता है. बीते सत्र में स्कूल में 111 बच्चे थे, लेकिन 2022-23 शिक्षा सत्र में एक शिक्षक के सस्पेंड होने और एक शिक्षक के प्रमोशन के बाद से स्कूल में शिक्षकों की कमी और बढ़ गई है.

मेडिकल लीव पर सारे टीचर

2023-24 सत्र में 27 सितंबर को शिक्षक स्वर्ण दीपक सिंह को स्कूल में भेजा गया था, लेकिन 11 दिसंबर से वे लगातार मेडिकल लीव पर हैं. इस बीच 6 मार्च 2024 को एक दिन के लिए वे स्कूल पहुंचे, लेकिन उसके बाद से नहीं आए.

बिना टीचर के कैसे चलेगा स्कूल ?

बरबसपुर के डोंगरीपारा गांव में स्थित प्राइमरी स्कूल का भी यही हाल है. इस सत्र में यहां एक भी शिक्षक नियुक्त नहीं किया गया है, केवल एक शिक्षक को अटैच कर काम चलाया जा रहा है. यहां पहली से पांचवीं तक के 32 छात्र हैं. बीते सत्र में जगदीश साहू और लव साहू इस स्कूल में प्रभार में थे, लेकिन प्रमोशन के बाद यह स्कूल पूरी तरह से शिक्षक विहीन हो गया है.

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