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हाथों में तिरंगा लिए मासूम बच्चे, पीछे सुरक्षाबल के जवान, पहली बार गांव में फहराया झंडा, 2025 तक जारी होता था फरमान

Independence Day: नक्सल प्रभावित माने जाने वाले सुकमा के 50 गांवों में पहली बार ध्वजारोहण हुआ है। इन गांवों में 15 अगस्त को पहली बार तिरंगा फहराया गया तो यहां के कई ग्रामीण भावुक हो गए।

सुकमा: छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में कभी माओवादियों के गढ़ माने जाने वाले गांवों में पहली बार ध्वजारोहण हुआ। सुकमा जिले के 50 गांवों में आजादी के बाद पहली बार तिरंगा फहराया गया है। इस दौरान कई ग्रामीण भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि सही मायने में हमारी आजादी आज हुआ है जब हमारे गांव में तिरंगा फहराया गया है।

मासूम बच्चों ने निकाली प्रभात फेरी

सुकमा जिले के एक गांव की तस्वीर सामने आई है। जहां हाथों में तिरंगा लेकर मासूम बच्चे प्रभात फेरी कर रहे हैं। उनके पीछे सुरक्षाबल के जवान चल रहे हैं। बिना डर और खौफ के इन लोगों ने पहली बार आजादी का जश्न मनाया। सुकमा के 50 से ज्यादा गांवों में पहली बार ग्रामीण बिना डर और दहशत के तिरंगे के नीचे स्वतंत्रता दिवस मनाते दिखाई दिए।


पहले नक्सली जारी करते थे फरमान

ग्रामीणों ने बताया कि पहले नक्सली फरमान जारी करते थे। नक्सलियों के फरमान के बाद गांव में काले झंडे फहराए जाते थे। लेकिन पहली बार हमारे गांव में तिरंगा फहराया गया है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

जिन 50 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया है। वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सुरक्षाबल की टुकड़ियों ने लोगों को देशभक्ति का संदेश दिया और उन्हें आजादी के मायने समझाए।

  • सुकमा के 50 गांवों में पहली बार फहराया गया झंडा
  • सुरक्षाबल के जवानों ने ग्रामीणों को दिया संदेश
  • गांवों में तिरंगा फहराता देख भावुक हो गए कई लोग
  • मासूम बच्चों ने गांवों में निकाली प्रभात फेरी

31 मार्च के बाद बदले हालात

अधिकारियों ने कहा कि इस साल 31 मार्च को राज्य के माओवादी खतरे से मुक्त होने की घोषणा के बाद सुकमा जिले रके 50 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया है। यह एक मील का पत्थर है। अब इन गांवों में भारत का संविधान लागू है। पहले नक्सलियों के खौफ के कारण यहां के लोग तिरंगा नहीं फहराते थे।

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