छत्तीसगढ़ में अब राशन के लिए कोटेदार की दुकान पर घंटों लाइन लगाने और 'तौल में गड़बड़ी' की शिकायतों का दौर खत्म होने वाला है।
बैंक एटीएम की तर्ज पर अब राजधानी रायपुर में प्रदेश का पहला 'ग्रेन एटीएम' (Annapurti Machine) लगने जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे शहर के शास्त्री मार्केट में स्थापित किया जाएगा।
यह मशीन हुबहू बैंक एटीएम की तरह काम करती है, बस इसमें कैश की जगह अनाज निकलता है। इसकी प्रक्रिया बेहद सरल रहेगी। लाभार्थी को अपना राशन कार्ड नंबर डालना होगा या आधार आधारित बायोमेट्रिक (अंगूठा) लगाना होगास्क्रीन पर अनाज की मात्रा प्रदर्शित होगी।
मशीन से निर्धारित मात्रा में चावल या गेहूं सीधे थैले में गिर जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में मात्र 30 से 45 सेकंड का समय लगेगा। इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि जीरो-एरर तौल सुनिश्चित होगी।
पायलट प्रोजेक्ट के बाद पूरे प्रदेश में विस्तार
सूत्रों के अनुसार, रायपुर में सफल क्रियान्वयन के बाद इस योजना को चरणबद्ध तरीके से अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में इस तरह की मशीन आधारित व्यवस्था को लागू करना अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है।
ग्रेन एटीएम 24 घंटे चालू रह सकता है, जिससे मजदूर और दैनिक वेतनभोगी वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी। वे अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय राशन प्राप्त कर सकेंगे, जिससे कामकाजी लोगों की परेशानी कम होगी।
इन राज्यों में ग्रेन एटीएम का प्रयोग हो चुका सफल
बिहार, ओडिशा, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में ग्रेन एटीएम का सफल प्रयोग पहले ही हो चुका है। वहां इस प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ी है और उपभोक्ताओं को तेज व सुगम सेवा मिली है। इसी मॉडल को देखते हुए छत्तीसगढ़ में भी इसे लागू करने की पहल की जा रही है।
खाद्य वितरण प्रणाली में बड़ा बदलाव संभव
यदि यह योजना सफल होती है, तो प्रदेश की खाद्य वितरण प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और उपभोक्ताओं को आसान, तेज और भरोसेमंद सेवा मिलेगी।
पढ़े राशनकार्ड धारियों की जानकारी एक नजर में
- कुल राशनकार्ड: 6,51,081
- प्राथमिकता श्रेणी: 4,50,054
- अंत्योदय कार्ड: 71,123
- एपीएल कार्ड: 1,26,240
ग्रेन एटीएम: सुविधा और पारदर्शिता का नया विकल्प
ग्रेन एटीएम योजना सिर्फ तकनीकी सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम जनता के लिए राशन वितरण में सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का एक नया विकल्प भी साबित हो सकती है।
इससे न केवल भ्रष्टाचार और हेराफेरी की संभावना कम होगी, बल्कि लाभार्थियों को तेज और भरोसेमंद सेवा भी मिलेगी। अब यह देखना बाकी है कि पायलट प्रोजेक्ट रायपुर में कितनी सफलता हासिल करता है और इसे पूरे प्रदेश में कब तक चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।